फल-सब्जियों के प्रसंस्करण से देश की अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती : सुप्रिया राय
फल-सब्जियों के प्रसंस्करण से देश की अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती : सुप्रिया राय
जौनपुर। कृषि उत्पादों का प्रसंस्करण और उनमें मूल्य संवर्धन किसानों की आर्थिक उन्नति के साथ देश की अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती दे सकता है। भारत फल और सब्जियों के उत्पादन में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है। ऐसे में आधुनिक तकनीक के माध्यम से कृषि उपज को प्रसंस्कृत कर वैश्विक बाजार तक पहुंचाना समय की मांग है। यह बातें रामनगर इंडस्ट्रियल एरिया फेज-वन स्थित फूड प्रोसेसिंग यूनिट आयुकृति ऑर्गेनिक की प्रबंध निदेशक सुप्रिया राय ने कहीं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में वैश्विक बाजार में रसायन रहित और पौष्टिक खाद्य पदार्थों की मांग तेजी से बढ़ रही है। किसानों की उपज का बेहतर मूल्य दिलाने और लोगों तक पौष्टिक खाद्य सामग्री पहुंचाने के लिए खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देना जरूरी है।
आयुकृति ऑर्गेनिक में भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी के वरिष्ठ वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में रुचि रखने वाले नव उद्यमियों ने औद्योगिक भ्रमण किया। इस दौरान वरिष्ठ वैज्ञानिक स्वाति शर्मा ने डिहाइड्रेशन तकनीक की उपयोगिता और संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बाजार में डिहाइड्रेटेड खाद्य सामग्रियों की मांग लगातार बढ़ रही है। खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखने और उनकी उपलब्धता लंबे समय तक बनाए रखने में यह तकनीक महत्वपूर्ण है। डिहाइड्रेशन की विभिन्न विधियों में इलेक्ट्रिक हीट आधारित ड्रायर एक उपयोगी तकनीक है। उन्होंने कहा कि किसानों से उपज खरीदने से लेकर अंतिम उत्पाद तैयार करने तक गुणवत्ता और तकनीकी मानकों का पालन किया जाए तो निर्यात बाजार में भी बेहतर मूल्य प्राप्त किया जा सकता है। इस अवसर पर प्लांट के मैनेजर ऑपरेशंस अतुल प्रकाश जायसवाल ने सभी आगंतुकों को फैक्ट्री का भ्रमण कराया। उन्होंने आधुनिक मशीनों की कार्यप्रणाली, प्रसंस्करण की प्रक्रिया और उत्पादन की तकनीकी बारीकियों से अवगत कराया।
बताया गया कि आयुकृति ऑर्गेनिक पूर्वांचल का एकमात्र वाणिज्यिक डिहाइड्रेशन प्लांट है। यहां फल, सब्जियों और विभिन्न प्रकार की पत्तियों को आधुनिक तकनीक से सुखाकर पाउडर के रूप में संरक्षित किया जाता है।
प्रबंध निदेशक सुप्रिया राय ने कहा कि संस्थान का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और आम लोगों तक पौष्टिक खाद्य उत्पाद पहुंचाना है। खाद्य प्रसंस्करण के माध्यम से स्थानीय कृषि उपज को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के साथ रोजगार और उद्यमिता की नई संभावनाएं भी विकसित की जा सकती हैं।
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