मध्यकालीन हिंदी साहित्य और प्रदर्शनकारी कलाएँ : परंपरा और निरंतरता विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी, महिला महाविद्यालय, बीएचयू।मध्यकालीन हिंदी साहित्य भारतीय लोक चेतना का उजाला है ~ भारत के पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ काशी भारतीय परंपरा की चेतना है, जहाँ परंपरा ठहरती नहीं है बल्कि निरंतर प्रवाहित होती रहती है ~ भारत के पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’जब भक्ति सामूहिक चेतना बनती है, तब वह उत्सव बन जाती है ~ भारत के पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’मध्यकालीन हिंदी साहित्य में विभिन्न कलाओं का अद्भुत समन्वय है ~ माननीय कुलपति, प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी
मध्यकालीन हिंदी साहित्य और प्रदर्शनकारी कलाएँ : परंपरा और निरंतरता विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी, महिला महाविद्यालय, बीएचयू। मध्यकालीन हिंदी साहित्य भारतीय लोक चेतना का उजाला है ~ भारत के पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ काशी भारतीय परंपरा की चेतना है, जहाँ परंपरा ठहरती नहीं है बल्कि निरंतर प्रवाहित होती रहती है ~ भारत के पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ जब भक्ति सामूहिक चेतना बनती है, तब वह उत्सव बन जाती है ~ भारत के पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ मध्यकालीन हिंदी साहित्य में विभिन्न कलाओं का अद्भुत समन्वय है ~ माननीय कुलपति, प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी दिनांक 9 से 10 अक्टूबर 2026 को सावित्री बाई फुले प्रेक्षागृह, महिला महाविद्यालय, बीएचयू के तत्वावधान में ‘मध्यकालीन हिंदी साहित्य और प्रदर्शनकारी कलाएँ : परंपरा और निरंतरता’ विषयक दो - दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन डॉ. हरीश कुमार के संयोजन में संपन्न हो रहा है। यह संगोष्ठी मध्यकालीन हिंदी साहित्य के संपूर्ण मूल्यांकन में एक सर्जनात्मक हस्तक्...