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नसीहत हमको तुम को दुनियाँ को अनमोल देगी

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नसीहत  हमको तुम को दुनियाँ को अनमोल देगी नसीहत  हमको तुम को दुनियाँ को अनमोल देगी।।  बंधी है आंख पर पट्टी जो एक दिन खोल देगी।।  तुम्हारे कारनामे छिप नहीं सकते असंभव है- गलत फ़हमी में मत रहना ये मूरत बोल देगी।। असंभव है कभी पानी में पत्थर गल नहीं सकता।।  लिखा है जो मुकद्दर में कभी भी टल नहीं सकता।।  जरूरी है समन्दर नदियों की औक़ात ही क्या है- अलावा सीप के मोती कहीं भी ढ़ल नहीं सकता।। झुकाकर सर किसी से प्रार्थना करना नहीं सीखे।।  तुम्हारी भूल है क्यो साधना करना नहीं सीखे।।  मैं चातक हूँ मुझे स्वाति के जल से सिर्फ मतलब है- कभी भी बादलों से याचना करना नहीं सीखे।। बगावत कर नहीं सकते जो बुजदिल दर्द सहते हैं।।  बहुत कम लोग है जो धार के विपरीत बहते हैं।।  कभी भी भूल कर परिणाम की चिंता नहीं करते- मेरी आदत है सच्चाई हमेशा खुल के कहते हैं।। कभी सूखी नदी ठहरी कभी बहती रवानी में।।  हज़ारों मोड़ आते हैं सभी की ज़िन्दगानी में।।  कोई रोता कोई हंसता मिला सब की अलग किस्मत- बहुत नज़दीक से देखा है दुनियाँ कहानी में।। --------------9919...

अधूरे रह गये अरमान बाबूजी

अधूरे रह गये अरमान बाबूजी तुम्हें खो कर अधूरे रह गये अरमान बाबूजी।।  है बौने शब्द कर सकते नहीं गुनगान बाबूजी।।  मधुर स्मृतियों को दिल में संजोये आज भी हैं हम- नमन् सत् बार करते हैं मेरे अभिमान बाबूजी।। कोई समता नहीं जग में तुम्हारा प्यार बाबूजी।।  हिमालय थे अडिग कुल के मेरे आधार बाबूजी।।  हृदय आकाश से ऊंचा समन्दर की थी गहराई- छलकता था दृगों से नेह अपरम्पार बाबूजी।। हमारे जन्मदाता और पालन हार बाबूजी।।  समन्दर दिल में लहराता था निर्मल प्यार  बाबूजी।।  पिता परमात्मा का रूप पावन नमन् करते हैं- हमारी नन्हीं आँखों के वृहद संसार बाबूजी।। निरा पतझड़ में मेरे वास्ते मधुमास बाबूजी।।   उपस्थिति आप की होती हमें आभास बाबूजी।।  हे स्मृति शेष तन से है विलग मन में बसे हो तुम- हृदय में आज भी करते हैं मेरे वास बाबूजी।। इरादों के तो सचमुच आप थे चट्टान बाबूजी।।   डिगा पाया नहीं कोई अडिग ईमान बाबूजी।।  मुझे पल पल सताती याद आती है  नमन् सत् सत्- हृदय से प्यार करते हैं सदा सम्मान बाबूजी।। ---------9919667469