ऊँ श्री ................ऊँ श्री सद्गुरूवे नम:............पुलकित रहेगा तन मन हर्षित हो रोम रोम।।भजु ओम् ओम् ओम् ओम् ओम् ओम् ओम् ।।
ऊँ श्री ................ऊँ श्री सद्गुरूवे नम:............ पुलकित रहेगा तन मन हर्षित हो रोम रोम।। भजु ओम् ओम् ओम् ओम् ओम् ओम् ओम् ।। कण कण में व्याप्त व्यापक रवि शशि प्रकाश व्योम। भजु ओम् ओम् ओम् ओम् ओम् ओम् ओम् ।। विधि लेख मेटता है करता है वो विलोम। भजु ओम् ओम् ओम् ओम् ओम् ओम् ओम् ।। मिट जाये अन्धकार हो पहाड़ मोम मोम। भजु ओम् ओम् ओम् ओम् ओम् ओम् ओम् ।। निश्तेज हो विलीन हो विनाश हो तम-तोम्। भजु ओम् ओम् ओम् ओम् ओम् ओम् ओम्।। अनुगामिनी हो गंगा जीवन हो सोम सोम। भजु ओम् ओम् ओम् ओम् ओम् ओम् ओम् ।। मन हवन कुण्ड सांसे सांकल गिरीश होम।। भजु ओम् ओम् ओम् ओम् ओम् ओम् ओम् ।। हरि ओम् ओम् ओम् ओम् ओम् ओम् ओम् ।। गुरु महराज की जय ऊँ ऊँऊँऊँ ऊँऊँऊँ सुबह शाम महा मंन्त्र से आरती करें। सक्तेशगढ़ आश्रम की पत्रिका दिव्य प्रभा मेंं प्रकाशित --------------------गिरीश जौनपुर