"सरयू से सागर तक": एक आईएएस अधिकारी के प्रेरक जीवनानुभव
"सरयू से सागर तक": एक आईएएस अधिकारी के प्रेरक जीवनानुभव राजेश विक्रांत महाराष्ट्र कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव महाराष्ट्र सरकार सतीश त्रिपाठी लिखित "सरयू से सागर तक" एक आम आत्मकथा की बजाय एक कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी के खट्टे मीठे अनुभवों की दास्तान है जिसमें लेखक ने काफी साफगोई बरती है और लेखक के अनुभवों से हमें कैसरुल जाफरी का एक शेर याद आ जाता है- हम तो आईने हैं दिखाएंगे दाग चेहरों के, जिसे खराब लगे सामने से हट जाए। लेखक ने इसमें आईएएस अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के बीच तनातनी व प्रोटोकॉल तोड़ने के जहां मामले दर्ज किए हैं वही दोनों में परस्पर विश्वास के कई प्रसंग भी पुस्तक में दर्शाए हैं। आईएएस अधिकारी व न्यायिक अधिकारी बीच तनातनी का एक रोचक प्रसंग भी पुस्तक में है। जब चंद्रपुर के कलेक्टर अरुण भाटिया तथा वहां के अतिरिक्त जज के बीच किसी बात को लेकर तनाव हो गया और जज ने भाटिया पर चोरी का इल्जाम लगाते हुए एफआईआर दर्ज करवा दिया था। लेखक ने ब्रह्मपुरी के एसडीओ के रूप में मृदु भाषी कलेक्टर राजगोपालन के साथ कार्य करने के कई जीवंत अनुभव ...