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*ब्राह्मण को दोषी क्यों बनाया जा रहा*

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*ब्राह्मण को दोषी क्यों बनाया जा रहा*      आज कल भारत में एक कहानी गजब मिर्च मसाला लगाकर लोगों को सुनाई जा रही है।और जो कम पढ़े लिखे निरक्षर हैं उनकी तो बात छोड़िए क्योंकि वो तो भोले और सरल हैं। उन्हें तो कोई भी तीन पाॅंच पढ़ा सकता है।इस गजब की कहानी को पढ़े लिखे खूब तन्मयता से सुन रहे हैं और उस पर अमल भी कर रहे हैं।पढ़ लिख तो लिए मगर अज्ञानता इनका पीछा नहीं छोड़ रही।जिसका नतीजा ए है कि ए आज भी वहीं हैं जहाॅं कल थे।ए तब भी औरों की ही बात सुनते थे,अब भी औरों की ही सुनते हैं।किसी बात को सुनते हैं,उसे गुनते नहीं।इसीलिए ए लोग प्रगति के पथ से कोसों दूर आज भी हैं।       कोई एक सयाना इनके समाज से या इनके समाज के सहारे आगे बढ़ने की चाह लिए,इनको झूठ की कहानी सुनाता है।वो कहानी कुछ यूॅं है कि तुम्हारी इस दशा का जिम्मेदार ब्राह्मण है। ब्राह्मण ही मनुस्मृति की ऋचाओं के हिसाब से देश चलाया।और तुम्हें अछूत बनाया।तुमसे मैला ढुलवाया तुम्हें पढ़ने नहीं दिया।आदि आदि।साथ दो चार गालियाॅं मिला दिया।स्वाद बढ़ाने के लिए।अब ए लोग पढ़े तो,मगर वो चीज नहीं पढ़े जो उपरोक्त ...

बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी से मुक्तेश्वर ने की शिष्टाचार भेंट, समग्र शिक्षा व्यवस्था पर हुई सार्थक चर्चा

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बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी से मुक्तेश्वर ने की शिष्टाचार भेंट, समग्र शिक्षा व्यवस्था पर हुई सार्थक चर्चा लखनऊ। शनिवार को बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी से आई.ए.एस. स्टडी सेंटर एवं मुक्ताकाश ज्ञानपीठ के संस्थापक शिक्षाविद् मुक्तेश्वर ने शिष्टाचार भेंट कर समग्र शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की। भेंट के दौरान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, नैतिक एवं मूल्यपरक शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी, शिक्षण में नवाचार तथा शिक्षा को अधिक प्रभावी, समावेशी एवं रोजगारोन्मुख बनाने जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। शिक्षाविद् मुक्तेश्वर ने शिक्षा के क्षेत्र में अपने अनुभव साझा करते हुए युवाओं की प्रतिभा को उचित मार्गदर्शन एवं अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार तथा विद्यार्थियों के हित में किए जा रहे प्रयासों पर अपने विचार व्यक्त किए।

चिकित्सक अखिलेश मिश्र ने पौधारोपण कर जन्मदिन मनाया

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चिकित्सक अखिलेश मिश्र ने पौधारोपण कर जन्मदिन मनाया  प्रयागराज। शनिवार को प्रातः काल अथर्वन फाउंडेशन द्वारा अपने समन्वयक चिकित्सक सुमन दुबे के पति डा. अखिलेश मिश्र के जन्मदिवस पर सलोरी स्थित सेंट कोलम्बस स्कूल के सामने पार्क में पौधरोपण एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन हुआ। उक्त पार्क का संरक्षण विद्यालय के निदेशक जितेन्द्र तिवारी करते हैं। अथर्वन फाउंडेशन ने जन्मदिवस, वैवाहिक वर्षगांठ एवं अन्य विशेष अवसरों को पौधरोपण और पर्यावरण जागरूकता के माध्यम से मनाने की परंपरा को अपने अभियान का अभिन्न अंग बना लिया है, ताकि प्रत्येक उत्सव प्रकृति संरक्षण का संदेश देने वाला जनांदोलन बन सके। इसी क्रम में शनिवार को पार्क में आँवला, हरसिंगार,अमरूद सहित कुल 9 पौधों का रोपण किया गया। सचिव डॉ. कंचन मिश्रा ने में जैव विविधता का महत्व बताया।कार्यक्रम समन्वयक प्रियंका ने किया। इस अवसर पर प्रधानाचार्या गीता चौहान एवं अथर्वन संस्था उपाध्यक्ष शैलेन्द्र सिंह, हेमंत कुमार, मधु, अर्चना वर्धन, सुधा गुप्ता, प्रीति गुप्ता, इंटर्न आरुषि मिश्रा अपनी माताजी के साथ तथा अवधेश श्रीवास्तव उपस्थित रहे।

*महापुरुष....बनाम....ग्रेट...!*

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*महापुरुष....बनाम....ग्रेट...!* बदलते परिदृश्य में....! लोगबाग....गाँव-देश-समाज में... खुद को कहाने को "ग्रेट"... बना रहे हैं टाइम बाउंड "टारगेट".. उनके शब्दकोश से गायब है शब्द "वेट"..."टॉलरेट और रिग्रेट".... पहले ऐसे लोग....गाँव-देश में... महापुरुष सम्बोधन से.... होते थे "अपडेट".... अवतार लेते थे....ये महापुरुष... लोक कल्याण हेतु....! लोकाभिराम कर्म होते थे.... उनके महापुरुष बनने के आधार आज के दौर का व्यक्ति.....! खुद कर रहा है "एन्टीसिपेट".... कि भविष्य में....अवश्य ही.... वह घोषित होगा व्यक्ति "ग्रेट".... इसी आस में सुरक्षित रखता है होनी-अनहोनी सब घटनाओं की.. सिलसिलेवार तश्वीरें और "डेट".... साथ ही....करता रहता है वह.... समय के साथ इनको "अपडेट"... बस मौका मिलते ही.... इन्ही को कराता हुआ "कोरिलेट" वह डेवलप कर लेता है.... खुद का आभासी संसार.... नैराश्य भाव और विषय पर...! उसको कतई नहीं होता "फेट"....           दूसरों में भी होता है कुछ खास.... इस पर लगा लेता है वह ...

*संस्कारों का खोखलापन*डॉ त्रिलोकचंद फतेहपुरी*

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*संस्कारों का खोखलापन* डॉ त्रिलोकचंद फतेहपुरी*        सनातन संस्कृति में संस्कारों को अत्यधिक महत्त्व दिया गया है । संस्कार किसी भी व्यक्ति के वे  अच्छे गुण ,  विचार ,  आदतें और नैतिक मूल्य होते हैं जो उसे उसके परिवार और समाज से मिलते हैं ।  वैसे सनातन संस्कृति में जन्म से लेकर मृत्यु तक के  षोडश संस्कारों की प्रायः चर्चा की जाती रही है ,  जिसमें - गर्भाधान, पुंसवन,  सीमंतोन्नयन , जातकर्म ,  नामकरण , निष्क्रमण , अन्नप्राशन , चूड़ाकर्म , कर्ण वेध,  विद्या आरंभ,  उपनयन , केशांत , समावर्तन , विवाह और अंत्येष्टि शामिल हैं । वही संस्कार व्यक्ति के चरित्र और व्यक्तित्व को सही दिशा व आकार प्रदान करते हैं । संस्कार ही व्यक्ति के व्यक्तित्व को बेहतर और उपयोगी बनाते हैं । सुधार ,  सजावट ,  शुद्धिकरण आदि भी संस्कार के पर्याय हो सकते हैं । सभी व्यक्ति अपनी संतान को संस्कार देकर  विनम्र , सुसभ्य , सुशिक्षित , सदाचारी , संवेदनशील बनाना चाहते हैं । संस्कारों की सार्थकता भी यही है -  बड़ों का सम्मान कर...

कवयित्री ख़ुशी सिंह ने एडीसीपी जितेन्द्र कुमार दुबे को पुस्तकें भेंट की

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कवयित्री ख़ुशी सिंह ने एडीसीपी जितेन्द्र कुमार दुबे को पुस्तकें भेंट की लखनऊ, 10 जुलाई 2026। हजरतगंज कोतवाली में शुक्रवार को सिकंदरा, आगरा निवासी कवयित्री ख़ुशी सिंह अपने पति विवेक सिंह के साथ कवि एवं पुलिस अधिकारी जितेन्द्र कुमार दुबे से शिष्टाचार भेंट करने पहुंची।   एसीपी कृष्णानगर अभिषेक कुमार पाण्डेय की गरिमामयी उपस्थिति में कवयित्री ख़ुशी सिंह ने जौनपुर के साहित्यकार रामजीत मिश्र की कृतियाँ 'बेटे का विवाह' एवं 'मार्मिक कथाएँ' एडीसीपी जितेन्द्र कुमार दुबे को भेंट कीं। भेंटवार्ता के दौरान साहित्य, समाज और सृजनधर्मिता से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई तथा साहित्यिक संवाद को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर भी विचार-विमर्श किया गया।

दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड द्वारा आयोजित प्रवक्ता हिन्दी पद पर शोध छात्रा कविता चौरसिया का प्रथम रैंक के साथ हुआ चयन

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दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड द्वारा आयोजित प्रवक्ता हिन्दी पद पर शोध छात्रा कविता चौरसिया का प्रथम रैंक के साथ हुआ चयन  प्रयागराज। दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड द्वारा आयोजित प्रवक्ता हिन्दी भर्ती परीक्षा में रोल नंबर 248241202003232 की अभ्यर्थी कविता चौरसिया ने प्रथम रैंक प्राप्त कर उल्लेखनीय सफलता अर्जित की है। मूल रूप से इब्राहीमपुर, पट्टी, जनपद प्रतापगढ़ की निवासी कविता चौरसिया वर्तमान में , प्रयागराज के हिन्दी विभाग में विभागाध्यक्ष प्रोफेसर भूरेलाल के मार्गदर्शन में शोध कार्य कर रही हैं। वह स्नातक में स्वर्ण पदक प्राप्त कर चुकी हैं। अपनी सफलता का श्रेय कविता चौरसिया ने अपने पारिवारिक सदस्यों के साथ माता-पिता, पतिदेव तथा टेलीग्राम  के सहपाठियों डाॅ. वंदना, डाॅ. रेखा पंत, अश्वनी तिवारी, ममता वर्मा, रेखा पटेल, खुशी, पंकज यादव, सोनी, श्रेयशी, मोनिका तिवारी एवं सीमा, हनुमान चौरसिया, बृजेश चौरसिया एवं अच्छे लाल चौरसिया को दिया।इस अवसर पर परिजनों, मित्रों और शुभचिंतकों ने कविता चौरसिया को उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक बधाई दीं।