*छुपने के लिए चोर को दो जगह बहुत सुरक्षित बहुत सुन्दर है।एक संसद भवन विधानसभा है तो दूसरा ईश का घर मंदिर है*
*छुपने के लिए चोर को दो जगह बहुत सुरक्षित बहुत सुन्दर है। एक संसद भवन विधानसभा है तो दूसरा ईश का घर मंदिर है* पहले राजभवन में मंत्री संत्री चपरासी राजा द्वारपाल सेनापति प्रधानमंत्री आदि लोग बैठते थे।जो देश को अपराधियों से मुक्त करने लिए विचार विनिमय किया करते थे। अपराधी पकड़कर लाये जाते थे। दरबार लगता था।राजा ही न्यायाधीश होता था।पक्ष विपक्ष की दलीलें सुनता था। फिर सजा सुनाता था।समय बदला मुगल आये,उनका रहन सहन तरीका थोड़ा अलग था।मगर शासन व्यवस्था वैसे ही रही। फिर अंग्रेज आये। बहुत अत्याचार किए। बहुत लूटे खसोटे। व्यभिचार किए।यहाॅं जो बदलाव हुआ वो ए कि कोई भी मुकदमा राजा न देखकर न्यायाधीश देखने लगा।वह अपने हिसाब से काम नहीं कर पाता था।कहने के लिए न्याधीश था।यदि सच में होता तो भगत सिंह राजगुरु सुखदेव जैसे नौनिहालों को फांसी न देता।वो तो सरकार की कठपुतली बना सभी एशो-आराम को भोग रहा था। लेकिन दरबार में तब भी अपराधी आसनारूढ़ नहीं थे। आजादी मिली।कुछ दिन ठीक ठाक चला।राजभवन ध्वस्त किए गये।मतलब उन्हें विवश किया गया कि व...