सुविधा शुल्क आम जनता दे, मौज मुफ्तखोर करें ! आखिर कब बदलेगी व्यवस्था ?सुविधा का लाभ उठाते मुफ्तखोर !
सुविधा शुल्क आम जनता दे, मौज मुफ्तखोर करें ! आखिर कब बदलेगी व्यवस्था ? सुविधा का लाभ उठाते मुफ्तखोर ! देश में हर नागरिक बेहतर और, सम्मानजनक जीवन जीने के लिए सुविधाएं चाहता है। इन सुविधाओं के बदले सरकार विभिन्न प्रकार के शुल्क और कर वसूलती है। सिद्धांत यह है कि जितनी बेहतर सुविधा, उतना अधिक शुल्क। लेकिन आज सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वास्तव में सुविधा उसी व्यक्ति तक पहुंच रही है, जो उसके लिए अपनी जेब से भुगतान कर रहा है? विडंबना यह है कि जो आम नागरिक हर महीने टैक्स देता है, टिकट खरीदता है, पास बनवाता है और सुविधा शुल्क चुकाता है, वही सबसे अधिक परेशान दिखाई देता है। दूसरी ओर कई ऐसे लोग हैं जो बिना शुल्क दिए या नियमों की अनदेखी कर उन्हीं सुविधाओं का भरपूर लाभ उठा रहे हैं। यही स्थिति आम जनता के मन में असंतोष और व्यवस्था के प्रति अविश्वास पैदा करती है। मुंबई महानगर इसका एक बड़ा उदाहरण है। लाखों लोग रोज़ी-रोटी की तलाश में प्रतिदिन लोकल ट्रेनों से सफर करते हैं। जनरल डिब्बों में इतनी भीड़ होती है कि कई स्टेशनों पर यात्रियों को ट्रेन में चढ़ना तक मुश्किल हो जाता है। राहत...