नर हो न निराश करो मन को...
नर हो न निराश करो मन को... लखनऊ। राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की जयंती के अवसर पर कवि दिवस का आयोजन शिक्षक बृजनंदन चौबे के आवास पर किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यप्रेमियों ने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी तथा काव्यपाठ के माध्यम से अपनी भावपूर्ण प्रस्तुतियाँ दीं। इस अवसर पर मैथिलीशरण गुप्त के साहित्यिक अवदान पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। विशेष रूप से उनकी कालजयी कृतियों 'साकेत' एवं 'पंचवटी' पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने इन रचनाओं के गूढ़ भाव, काव्यगत एवं शिल्पगत विशेषताओं, भाषा-सौष्ठव, चरित्र-चित्रण, राष्ट्रीय चेतना तथा मानवीय मूल्यों को रेखांकित करते हुए उनके साहित्य की समकालीन प्रासंगिकता पर अपने विचार व्यक्त किए। उपस्थित साहित्यप्रेमियों ने कहा कि राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त का साहित्य भारतीय संस्कृति, राष्ट्रप्रेम और मानवीय संवेदनाओं का अनुपम दस्तावेज है, जो आज भी नई पीढ़ी को प्रेरणा प्रदान करता है। कार्यक्रम में योगेन्द्र चौबे, अरुणिमा चौबे, रूद्रांश, रम्या, मनोज तिवारी, महेन्द्र मिश्र, अश्वनी तिवारी, ...