प्रेमचंद की लेखनी ने साहित्य को लोकजीवन से जोड़कर उसे जनचेतना का सशक्त माध्यम बनाया : जितेन्द्र कुमार दुबे मुंशी प्रेमचंद की जयंती की पूर्व संध्या पर साहित्यिक गोष्ठी का हुआ आयोजन
प्रेमचंद की लेखनी ने साहित्य को लोकजीवन से जोड़कर उसे जनचेतना का सशक्त माध्यम बनाया : जितेन्द्र कुमार दुबे मुंशी प्रेमचंद की जयंती की पूर्व संध्या पर साहित्यिक गोष्ठी का हुआ आयोजन लखनऊ। शुक्रवार को सर्वप्रथम पावन श्रावण मास के प्रारंभ की शुभकामनाएँ देते हुए कवि एवं एडीसीपी जितेन्द्र कुमार दुबे ने हिन्दी के महान कथाकार, उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 146वीं जयंती की पर आयोजित साहित्यिक गोष्ठी में उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद की लेखनी ने साहित्य को लोकजीवन से जोड़कर उसे जनचेतना का सशक्त माध्यम बनाया। प्रेमचंद ने अपनी लेखनी के माध्यम से भारतीय समाज की वास्तविक तस्वीर प्रस्तुत करते हुए शोषित, वंचित और ग्रामीण जीवन की पीड़ा को सशक्त स्वर दिया। कवि जितेन्द्र कुमार दुबे ने बताया कि प्रेमचंद कृति कर्बला और रंगभूमि का प्रकाशन लखनऊ में हुआ था। उन्होंने उक्त रचना के कथावस्तु एवं साहित्यिक महत्ता पर विस्तृत चर्चा की। अश्वनी तिवारी ने कहा कि, प्रेमचंद का साहित्य आज भी समाज को मानवीय मूल्यों, संवेदनशीलता और सामाजिक न्य...