दिल्ली विश्वविद्यालय में दो दिवसीय 'रचयिता साहित्य उत्सव' का समापन
दिल्ली विश्वविद्यालय में दो दिवसीय 'रचयिता साहित्य उत्सव' का समापन दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के कला संकाय में 'रचयिता फाउंडेशन' की ओर से आयोजित दो दिवसीय 'रचयिता साहित्य उत्सव' का सफलतापूर्वक समापन हुआ। उत्सव में लोक, साहित्य, भाषा, स्त्री-विमर्श, गांधीवादी विचार, राष्ट्रीय अस्मिता, कविता, रील्स के दौर में पुस्तकों की बदलती भूमिका और पत्रकारिता जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, हंसराज कॉलेज की प्राचार्या प्रो. रमा, अनूप लाठर, प्रो. रंजन त्रिपाठी एवं रोजगार विथ अंकित के प्रतिनिधि अमर चौधरी ने दीप प्रज्ज्वलन करके कार्यक्रम का उद्घाटन किया। उत्सव के पहले सत्र 'साहित्य का लोक और लोक का साहित्य' में प्रो. मंजू मुकुल कांबले ने कविताओं के माध्यम से लोक, भाषा और साहित्य के संबंधों को रेखांकित किया। प्रो. अनूप लाठर ने हिंदी और उर्दू सहित भाषाओं के उद्गम पर चर्चा किए।सत्र का संचालन उत्तम कुमार ने किया। 'कविता की भाषा' सत्र में प्रो. रामेश्वर ने कहा कि कविता की भाषा को व्याकरण, शब्दावली, पारंपरिक शिल...