*इन्कार मत करना।**--------- गिरीश कुमार गिरीश*
*इन्कार मत करना।*
*--------- गिरीश कुमार गिरीश*
हमेशा हद में रहना अपनी सीमा पार मत करना।।
वो गिर जाते हैं नज़रों से जो खुद को बेंच देते हैं-
अनादर से मिले आदर कभी स्वीकार मत करना।।
जलन ईर्ष्या कपट दिल में कभी आबाद मत करना।।
किसी के आशियानें को कभी बर्बाद मत करना।।
मिलेगें हर तरह के लोग अच्छे भी बुरे होगें-
नियंत्रण मन पे रखना मन कभी आजाद मत करना।।
करे कोई अगर विश्वास तो विश्वास न टूटे।।
लगाये बैठा हो जो आस उसकी की आस न टूटे।।
मै पीता ही रहूँ रस गंध स्मृतियों की बस तेरे-
मिले तृप्ति मगर जारी रहे ये प्यास न टूटे।।
ग़मों का भूल कर भी तुम कभी इज़हार मत करना।।
किसी की याद में दिल को कभी बेज़ार मत करना।।
मुझे मालूम है दिल टूटने से दर्द होता है-
किसी से टूट कर के इस कदर से प्यार मत करना।।
किसी से भी कभी तुम दर्द का इज़हार मत करना।।
जो पत्थर हो ह्रदय का भूल कर के प्यार मत करना।।
नहीं तोड़ोगे दिल मेरा कसम खाओ तो मांगे हम-
मुझे डर लग रहा है तुम सनम इन्कार मत करना।।
रहे बस याद इतना गह लिये तो हाथ न छूटे।।
है विनती बस यही महबूब मेरे साथ न छूटे।।
झुका मस्तक रहे बस नेह से दर्शन मिले गुरुवर-
तेरी चरणों से सेवक का कभी ये माथ न छूटे।।
मेरी ख़्वाहिश है पूरी हो किसी की आस न टूटे।।
बहुत तकलीफ होती है कभी विश्वास न टूटे।।
मेरी चाहत यही है बस सभी हो तृप्त जीवन में-
कभी प्यासे किसी चातक की अनबुझ प्यास न टूटे।।
;;;;;;;;;;;;9919667469
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