अहर्निश कर्तव्यपरायणता की आधारस्तंभ डॉ. गीता मिश्रा : प्रो. आर. एन. त्रिपाठी
अहर्निश कर्तव्यपरायणता की आधारस्तंभ डॉ. गीता मिश्रा : प्रो. आर. एन. त्रिपाठी
चित्रकूट। जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन के समीप गरिमामय श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.(डाॅ.) आर. एन. त्रिपाठी ने विश्वविद्यालय की आधारस्तंभ रहीं डॉ. (कु.) गीता देवी मिश्रा की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. त्रिपाठी भावुक हो उठे। उन्होंने अपनी अंतर्मन की अनुभूतियों को साझा करते हुए कहा कि मुझे यहां आए हुए अभी दो ही दिन हुए हैं, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि यह पुनीत कार्यक्रम मेरे आगमन के प्रथम दिवस ही संपन्न हो जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि विशिष्ट विभूतियों के भौतिक रूप से विदा हो जाने के बाद भी उनके महान् कार्य सदैव उनकी उपस्थिति का बोध कराते रहते हैं। डॉ. गीता मिश्रा के कार्य विश्वविद्यालय परिसर में उनकी जीवंतता के अनुपम प्रमाण हैं।
प्रो. त्रिपाठी ने दुर्गासप्तशती के प्रसिद्ध श्लोक 'या देवी सर्वभूतेषु छाया रूपेण संस्थिता' का उल्लेख करते हुए 'छाया' शब्द की गूढ़ व्याख्या की। उन्होंने बताया कि छाया का एक अर्थ प्रतिमा भी होता है। डॉ. गीता देवी (बुआ जी) को आदिशक्ति के जीवंत विग्रह के रूप में नमन करते हुए उन्होंने कहा कि उनके जीवन से प्रेरणा लेकर हम सभी को अपने कर्तव्यों का निर्वहन सदैव प्रसन्नचित्त होकर और निरंतर करते रहना चाहिए।
इस अवसर पर जीवनपर्यंत कुलाधिपति के निजी सचिव रमापति मिश्रा ने डॉ. गीता मिश्रा की कर्तव्यनिष्ठा, अद्वितीय समर्पण एवं उच्च जीवन मूल्यों से जुड़े संस्मरण साझा किए। उनके संस्मरण सुनाते समय गला भर आया और उपस्थित सभी लोग भावुक हो उठे।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव मधुरेन्द्र कुमार पर्वत सहित विश्वविद्यालय परिवार के शिक्षक, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने डॉ. गीता मिश्रा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके आदर्शों एवं बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
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