राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान द्वारा राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर सरदार वल्लभभाई पटेल की स्मृति में काव्य गोष्ठी संपन्न

राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान द्वारा राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर सरदार वल्लभभाई पटेल की स्मृति में काव्य गोष्ठी संपन्न
लखनऊ।राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान के तत्वाधान में संस्थान कार्यालय में सरदार वल्लभभाई पटेल की स्मृति में शपथ ग्रहण एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता डॉ0 शोभा दीक्षित 'भावना' ने किया। मुख्य अतिथि कामता प्रसाद सिंह, विशेष सचिव भाषा एवं विशिष्ट अतिथि चंद्रिका प्रसाद वर्मा, संयुक्त सचिव, ग्राम्य विकास विभाग एवं हरी लाल सिंह, उपसचिव, मुख्य वक्ता अभय रंजन सिंह, उप सचिव गृह विभाग रहे। कुशल संचालन संस्थान के उपाध्यक्ष डॉ0 उमेश 'आदित्य' ने किया।
कार्यक्रम का आरंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती एवं लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर किया गया। वाणी वंदना डॉ शोभा दीक्षित भावना ने की। संस्थान के अध्यक्ष डॉ.अखिलेश कुमार मिश्रा संप्रति विशेष कार्याधिकारी राज्य निर्वाचन आयोग उ.प्र. द्वारा संदेश दिया गया कि 
“राष्ट्रीय एकता दिवस हमें देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देता है। साहित्य और कविता समाज को जोड़ने तथा राष्ट्रप्रेम की भावना को सशक्त करने का प्रभावी माध्यम हैं।”
वही महामंत्री डॉ.सीमा गुप्ता ने कहा कि,
“राष्ट्रीय एकता हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। आइए, साहित्य के माध्यम से आपसी सद्भाव, भाईचारे और राष्ट्रप्रेम का संदेश जन-जन तक पहुँचाकर ‘एक भारत–श्रेष्ठ भारत’ की भावना को और मजबूत करें।”
डॉ0 उमेश 'आदित्य'- टुकड़ा टुकड़ा जोड़ कर किया राष्ट्र विस्तार, हर संभव का नाम है श्री वल्लभ सरदारl
डॉ0 हरी प्रकाश 'हरि'- लौह पुरुष कहलाते थे, सरदारों के सरदार, सबसे बढ़ कर असरदार थे, लौह पुरुष सरदारl
अभय रंजन सिंह -
देश की एकता के लिए सरदार वल्लभ भाई पटेल ने सबसे अधिक त्याग कियाl उन्होंने व्यक्तिगत हितों की अपेक्षा राष्ट्र हित को ऊपर रखाl
सुरेन्द्र शर्मा - जिस की हुंकार से भारत का अभिमान जगा थाl वो पटेल ही थे जिससे पूरा हिंदुस्तान जागा थाl
विपुल मिश्र - ऐसा वीर सपूत था, था असली सरदार भारत के निर्माण में है अनुपम किरदारl
जयेंद्र चतुर्वेदी — “राष्ट्रीय एकता ही सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला है।”
विवेक — “विविध भाषाओं, संस्कृतियों और परंपराओं के बावजूद एकता ही भारत की सबसे बड़ी पहचान और शक्ति है।”
अभिषेक पाण्डेय — “साहित्य समाज को जोड़ने वाला सेतु है, जो राष्ट्रीय एकता और सद्भाव की भावना को जन-जन तक पहुँचाता है।”
गायत्री पाल — “आपसी प्रेम, सौहार्द और भाईचारे से ही ‘एक भारत–श्रेष्ठ भारत’ का संकल्प साकार होगा।”
संजीव मिश्रा —“राष्ट्र की अखंडता और एकता की रक्षा प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य और सर्वोच्च दायित्व है। शगुफ्ता — “अनेकता में एकता हमारी संस्कृति की सुंदरता है और यही भारत की वास्तविक शक्ति है।”
चंद्रदेव दीक्षित 'चंद्र' - संवेदन शुचि पूर्ण करो और मृदुता का विस्तार करोl
रामराज भारती - वल्लभ भाई पटेल की शान तिरंगा हैl
इनके अतिरिक्त कार्यक्रम में राम अचल वर्मा, चित्रा दीक्षित, पूर्णिमा बेदार श्रीवास्तव, हरी लाल सिंह, चन्द्रिका प्रसाद, जय प्रकाश वर्मा, महेंद्र कुमार वर्मा, मीना गौतम, अलका गुप्ता प्रियदर्शिनी, सुरेश कुमार, पम्मी सिंह, अखिलेश त्रिवेदी एवं आदित्य तिवारी उपस्थित रहे।
समारोह में राष्ट्रीय एकता दिवस पर शपथ ग्रहण कराई गईl

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