साहित्यिक संस्था कोशिश की काव्यगोष्ठी संपन्न
साहित्यिक संस्था कोशिश की काव्यगोष्ठी संपन्न
जौनपुर । साहित्यिक और सांस्कृतिक संस्था कोशिश की मासिक काव्य गोष्ठी बाबू रामेश्वर प्रसाद सिंह सभागार रासमंडल जौनपुर में आयोजित हुई।उक्त अवसर पर ख्यातिप्राप्त कवि जनार्दन प्रसाद अष्ठाना पथिक की गजल संग्रह " किससे कहूं " का लोकार्पण वरिष्ठ साहित्यकारों की उपस्थिति में हुआ।कार्यक्रम की अध्यक्षता समीक्षा दृष्टि संपन्न कवि सूर्य भान उपाध्याय और मुख्य अतिथि की भूमिका में मुंबई से कवि और पत्रकार विनय शर्मा दीप उपस्थित रहे।मां वीणा पाणि की आराधना के पश्चात नंद लाल समीर की रचना - मेरे भारत तेरी शान निराली है, कहीं जश्नै ईद,कहीं दीवाली है।राजेश पाण्डेय की रचना कारण सत्ता आधुनिक मानव को आध्यात्मिक चेतना से जोड़ती लगी तो वहीं अनिल उपाध्याय की क्षणिका--आज करेगा,कल पायेगा/यकीनन बुरा कर्म कलपायेगा/मानव की कर्म फल बांच गयी।कवि रामजीत मिश्र का शेर---घर में भी मोलभाव का बाजार गर्म है/दिखता है फायदा ही, अपनापन नहीं रहा/नैतिक मूल्यों के क्षरण को दिखा गया। डाक्टर संजय सिंह सागर का गीत --बेचता हूं सपन ग़म के बाजार में/आज शामिल हो तुम भी खरीदार में/यथार्थ के भाव भूमि पर खड़ा कर दिया। अमृत प्रकाश का शेर*शायद किसी ने फूंक दिया घर गरीब का /कल रात मेरे गांव में क्या रोशनी रही/व्यवस्था को आईना दिखा गया तो वहीं आशिक जौनपुरी का शेर --मुझे कुछ देर जरा मैकदे में रहने दें/जरा भी होश में आऊंगा, चला जाऊंगा/खूब पसंद किया गया। पथिक का गीत --जब से घर तुम छोड़ गये हो बीत रही है कैसे/वियोग में दग्ध हृदय का करुण उद्गार लगा।एस बी उपाध्याय की रचना मन के उधेड़ बुन को चित्रित कर गयी। विनय शर्मा दीप ने आदि शक्ति मां जगदम्बा की स्तुति सवैया छंद में किया --आदि अनंत तुही जग में/तृण पल्लव वास तुम्हार भवानी/गोष्ठी भक्ति में लीन हो गयी।अशोक मिश्र की रचना --मां ने दीपक बारा होगा इस दीवाली/अंधियारा फुफकारा होगा इस दीवाली/विकृति के विरुद्ध दीप जलाकर रोशनी का संदेश दी। गोष्ठी में प्रोफेसर आर एन सिंह ने आगामी वार्षिक समारोह आयोजित करने के संबंध में दिशा निर्देश दिया। गोष्ठी में ओंकार नाथ यादव कलाधर, फूल चंद भारती, दिनेश कपूर, रूपेश साथी, कमलेश कुमार, प्रदीप श्रीवास्तव की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। डाक्टर विमला सिंह ने आये साहित्यिकारो के प्रति आभार व्यक्त किया।
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