अहिंसा के मार्ग पर निरंतर संघर्ष करते रहना चाहिए’ — श्रीमती इला गांधी
अहिंसा के मार्ग पर निरंतर संघर्ष करते रहना चाहिए’ — श्रीमती इला गांधी
मालाड, 1 अक्टूबर 2026: “अन्याय को देखकर चुप रहना अर्थात उस अन्याय का समर्थन करना है। इसलिए अन्याय के विरुद्ध अहिंसा के मार्ग पर निरंतर संघर्ष करते रहना चाहिए।” यह विचार महात्मा गांधी की पौत्री श्रीमती इला गांधी ने व्यक्त किए। वे जनसेवा समिति द्वारा संचालित श्री एम. डी. शाह महिला महाविद्यालय में महात्मा गांधी जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित विशेष व्याख्यान में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रही थीं।
श्रीमती इला गांधी ने कहा कि महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा और सामाजिक न्याय के विचार आज भी पूरी तरह प्रासंगिक हैं। सत्याग्रह का अर्थ केवल शांत रहना नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध अहिंसक तरीके से आवाज उठाना है। उन्होंने हिंसा के स्थान पर अहिंसा, द्वेष के स्थान पर प्रेम तथा असहिष्णुता के स्थान पर सहिष्णुता को अपनाने का आह्वान किया।
‘जनरेशन ज़ेड’ (Gen Z) को संबोधित करते हुए उन्होंने ‘फीनिक्स’ में अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा किए और युवाओं से शांति एवं अहिंसा के मार्ग को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि संवाद के अभाव के कारण लोकतांत्रिक मूल्यों को चुनौती मिल रही है और निर्दोष लोगों को इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है। उन्होंने सैन्य खर्च में लगातार हो रही वृद्धि पर चिंता व्यक्त करते हुए देशों से व्यापक विनाश करने वाले हथियारों के निर्माण को रोकने का आह्वान किया। साथ ही, शांतिपूर्ण विश्व के निर्माण के लिए नागरिक समाज को सतर्क और सक्रिय रहने की आवश्यकता पर बल दिया।
महात्मा गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित इस विशेष व्याख्यान के आयोजन का सुझाव जनसेवा समिति के अध्यक्ष डॉ. मोहनभाई पटेल ने दिया। वे स्वयं महात्मा गांधी के विचारों के अनुयायी हैं। उनके मार्गदर्शन में महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. दीपा शर्मा द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की प्रस्तावना करते हुए प्राचार्या डॉ. दीपा शर्मा ने महाविद्यालय की शैक्षणिक एवं सामाजिक गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुंबई उपनगर में महिलाओं के शैक्षणिक एवं सामाजिक विकास के लिए महाविद्यालय पिछले 58 वर्षों से निरंतर कार्यरत है।
कार्यक्रम की प्रमुख अतिथि श्रीमती इला गांधी का परिचय एवं स्वागत उपप्राचार्या प्रा. शुभा आचार्या ने किया। अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. मोहनभाई पटेल ने कहा, “आज पूरे विश्व को महात्मा गांधी के विचारों की आवश्यकता है। दक्षिण अफ्रीका में रहकर श्रीमती इला गांधी महात्मा गांधी के विचारों और कार्यों को जिस प्रकार आगे बढ़ा रही हैं, यह अत्यंत गौरव की बात है।”
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रा. मेरुप्रभा मिश्रा एवं छात्राओं द्वारा प्रस्तुत ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए…’ भजन से हुआ। इस अवसर पर संस्था की उपाध्यक्षा श्रीमती निशा सागर, सचिव डॉ. कल्पना दवे, संस्था के सम्माननीय सदस्य, प्राध्यापकगण एवं छात्राएँ उपस्थित थीं।
कार्यक्रम का आयोजन मातोश्री सुरजबा सभागृह में किया गया तथा इसे गूगल लिंक एवं यूट्यूब के माध्यम से ऑनलाइन भी प्रसारित किया गया। कार्यक्रम का सूत्रसंचालन डॉ विद्यालक्ष्मी देसाई ने किया, जबकि डॉ. सीना पॉल ने आभार व्यक्त किया।
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