शिक्षा के साथ अपनी संस्कृति, परंपराओं और धर्म से भी जुड़े रहना जरूरी : पारस चपलोत

शिक्षा के साथ अपनी संस्कृति, परंपराओं और धर्म से भी जुड़े रहना जरूरी : पारस चपलोत 
भायंदर। श्री अजरामर जैन स्थानकवासी संघ, वागड नगर की ओर से मीरारोड पूर्व में शिक्षा को प्रोत्साहन देने और बच्चों में धार्मिक एवं नैतिक संस्कारों को मजबूत करने के उद्देश्य से समाजसेवा कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान 30 मेधावी बालक बालिकाओं को शिक्षा में सहयोग के लिए साइकिल और नोटबुक सहित शैक्षणिक सामग्री वितरित की गई। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करने के साथ उनकी शैक्षणिक यात्रा को सुविधाजनक बनाना रहा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा जिलाध्यक्ष दिलीप जैन उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों के रूप में दानवीर भामाशाह पारस चपलोत, संघ प्रमुख पीयूष केनिया, महावीर सुराणा, कमलेश छाजेड़ और रचित शाह ने सहभागिता की। अतिथियों ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का आधार है। इसके साथ ही नैतिक मूल्यों और संस्कारों का जीवन में विशेष महत्व है। राजस्थान सरकार द्वारा 'भामाशाह रत्न' की उपाधि से विभूषित वरिष्ठ समाजसेवी पारस चपलोत ने कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ बच्चों को अपनी संस्कृति, परंपराओं और धर्म से भी जुड़े रहना चाहिए, ताकि वे जिम्मेदार नागरिक बनकर समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान दे सकें। उन्होंने बच्चों से नियमित रूप से जैन पाठशाला में आने और जैन धर्म की शिक्षाओं एवं संस्कारों को अपने जीवन में अपनावे का आह्वान किया। कार्यक्रम में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और वई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने पर जोर दिया गया। साइकिल और पठन सामग्री प्राप्त कर विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहन मिला। यह आयोजन समाज की ओर से शिक्षा और संस्कारों को साथ लेकर आगे बढ़ने की पहल के रूप में सामने आया।

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