*भारत को बचाना है। सनातन की संस्कृति को संवारना है। और इंसानियत को जगाना है।**अपराध भ्रष्टाचार और नफरत के विरुद्ध उठे देश की सामूहिक आवाज*
*भारत को बचाना है। सनातन की संस्कृति को संवारना है। और इंसानियत को जगाना है।*
*अपराध भ्रष्टाचार और नफरत के विरुद्ध उठे देश की सामूहिक आवाज*
रिपोर्टर, सुरेश कुमार शर्मा
*विशेष विचार। जौनपुर उत्तर प्रदेश*
भारत केवल जमीन का एक टुकड़ा नहीं। बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था संस्कृति सभ्यता त्याग बलिदान और भाईचारे का प्रतीक है। यह वह देश है। जहां अलग अलग भाषाएं वेशभूषाएं परंपराएं और उपासना पद्धतियां होने के बावजूद एक साथ रहने की प्रेरणा मिलती है। हमारी सबसे बड़ी ताकत हमारी विविधता और एक दूसरे के प्रति सम्मान है।
आज देश के प्रत्येक नागरिक को एक गंभीर प्रश्न पर विचार करना चाहिए। क्या हम अपने देश को अपराध भ्रष्टाचार नफरत और सामाजिक बिखराव से मुक्त बनाने के लिए अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
*सनातन धर्म की रक्षा केवल नारे लगाने से नहीं। बल्कि उसके मूल्यों को अपने जीवन में उतारने से होगी।*
सनातन परंपरा हमें सत्य अहिंसा दया करुणा सेवा संयम और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। भगवान श्रीराम का आदर्श मर्यादा का संदेश देता है। भगवान श्रीकृष्ण का उपदेश कर्तव्य और धर्म के लिए खड़े होने की प्रेरणा देता है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति धर्म का नाम लेकर अन्याय करता है। भ्रष्टाचार में लिप्त होता है। महिलाओं का अपमान करता है। या किसी निर्दोष को प्रताड़ित करता है। तो उसके आचरण पर प्रश्न उठाना धर्म का अपमान नहीं। बल्कि धर्म के नैतिक मूल्यों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना है।
*अपराध और भ्रष्टाचार को किसी धर्म की पहचान मत बनने दीजिए।*
आज जब कहीं अपराध होता है। कहीं रिश्वतखोरी की शिकायत सामने आती है। कहीं महिलाओं और कमजोर लोगों के साथ अन्याय होता है। तो हमें निष्पक्ष होकर सवाल पूछने चाहिए। अपराधी की पहचान उसके कर्म और कानून के अनुसार तय होनी चाहिए। न कि उसके धर्म जाति या राजनीतिक संबंधों के आधार पर।
यह भी समझना होगा कि किसी एक धर्म को बदनाम करने के लिए हर अपराध को उसी धर्म से जोड़ देना उचित नहीं है। किसी व्यक्ति का गलत आचरण पूरे समाज या संपूर्ण धार्मिक परंपरा का प्रतिनिधित्व नहीं करता है।
*धर्म के नाम पर नफरत फैलाने वालों से भी सावधान रहिए और धर्म के नाम पर अन्याय करने वालों से भी।*
सरकारें आती जाती रहेंगी। लेकिन देश हमेशा रहेगा।
हम किसी एक सरकार की नहीं बल्कि भारत के भविष्य की बात कर रहे हैं। लोकतंत्र में सरकारें बदलती रहती हैं। प्रत्येक सरकार को देश की सुरक्षा कानून व्यवस्था भ्रष्टाचार पर नियंत्रण महिलाओं की सुरक्षा गरीबों को न्याय और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए जवाबदेह होना चाहिए।
यदि कोई सरकार सनातन संस्कृति के संरक्षण धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए काम करती है। तो उसके कार्यों का स्वागत किया जा सकता है। लेकिन साथ ही अपराध भ्रष्टाचार और अन्याय के मामलों में उसकी जवाबदेही भी सुनिश्चित होनी चाहिए।
किसी सरकार का मूल्यांकन केवल नारों से नहीं बल्कि उसके कार्यों उपलब्धियों।कमियों और जनता के जीवन पर पड़े प्रभाव से होना चाहिए। यही लोकतंत्र की ताकत है। और यही जागरूक नागरिक की पहचान है।
*सनातन की रक्षा के साथ भारत की एकता भी हमारी जिम्मेदारी है।*
हम सनातन धर्म की रक्षा की बात करें। अपनी संस्कृति और परंपराओं पर गर्व करें। अपने मंदिरों तीर्थस्थलों और ऐतिहासिक धरोहरों का सम्मान करें। लेकिन साथ ही यह भी याद रखें कि भारत के संविधान ने प्रत्येक नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता और समानता का अधिकार दिया है।
किसी दूसरे धर्म के व्यक्ति से घृणा करना सनातन की रक्षा का रास्ता नहीं हो सकता। अपने धर्म के प्रति निष्ठा और दूसरे की आस्था के प्रति सम्मान दोनों साथ चल सकते हैं।
हमें ऐसा भारत बनाना है। जहां मंदिरों में आस्था सुरक्षित हो। मस्जिदों में इबादत सुरक्षित हो। गुरुद्वारों में सेवा की परंपरा फलती फूलती रहे। चर्चों में प्रार्थना करने वालों को सम्मान मिले। और हर नागरिक बिना भय के अपने अधिकारों के साथ जीवन जी सके।
*अब देश के नागरिकों को भी जागना होगा।*
केवल सरकारों के भरोसे देश की हर समस्या का समाधान नहीं हो सकता। नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
भ्रष्टाचार दिखे तो प्रमाण के साथ उचित प्राधिकरण से शिकायत करें।
अपराध के विरुद्ध आवाज उठाएं और कानून को अपना काम करने दें।
सोशल मीडिया पर किसी धर्म या समुदाय के विरुद्ध अपुष्ट खबरें न फैलाएं।
महिलाओं बुजुर्गों बच्चों और कमजोर वर्गों के सम्मान एवं सुरक्षा के लिए खड़े हों।
अपने बच्चों को धर्म के संस्कारों के साथ संविधान कर्तव्य और मानवता का पाठ भी पढ़ाएं।
जाति धर्म और राजनीतिक विचारधारा से ऊपर उठकर अन्याय के विरुद्ध एकजुट हों।
याद रखिए। देश केवल सीमाओं पर तैनात जवानों से सुरक्षित नहीं होता। देश तब भी मजबूत होता है। जब उसका नागरिक ईमानदार हो। उसका प्रशासन जवाबदेह हो। उसका न्याय निष्पक्ष हो। और उसका समाज एक दूसरे के दुःख दर्द को समझता हो।
*आइए। एक संकल्प लें।*
हम सनातन संस्कृति का सम्मान करेंगे। भारत की एकता की रक्षा करेंगे। अपराध और भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज उठाएंगे ।किसी निर्दोष को धर्म या जाति के आधार पर दोषी नहीं ठहराएंगे। और किसी भी सरकार से देशहित में बेहतर काम करने की अपेक्षा रखेंगे।
*हमारा उद्देश्य किसी से लड़ना नहीं। बुराइयों से लड़ना है। हमारा उद्देश्य किसी धर्म को छोटा करना नहीं। अपने धर्म के श्रेष्ठ मूल्यों को जीवन में उतारना है। हमारा उद्देश्य किसी सरकार की अंधभक्ति नहीं। बल्कि भारत की उन्नति और जनता के हितों की रक्षा करना है।*
आइए। ऐसा भारत बनाएं जहां सनातन के संस्कार हों। संविधान का सम्मान हो। न्याय का शासन हो। भ्रष्टाचार पर अंकुश हो। अपराधियों के विरुद्ध निष्पक्ष कार्रवाई हो और प्रत्येक नागरिक के हृदय में देश के प्रति प्रेम हो।
*क्योंकि भारत मजबूत होगा। तभी हमारी संस्कृति सुरक्षित होगी। हमारी संस्कृति के श्रेष्ठ मूल्य जीवित रहेंगे। तभी हमारी आने वाली पीढ़ियां अपनी विरासत को समझेंगी। और मानवता जीवित रहेगी। तभी भारत वास्तव में महान बनेगा।*
जय हिंद। जय भारत।
सनातन संस्कृति का सम्मान हो। भारत माता का गौरव बढ़े। और मानवता का कल्याण हो।
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