साहित्यकार भगवानदास मोरवाल को एक लाख रुपए के ‘ज्ञानाब्धि राष्ट्रीय पुरस्कार’ से सम्मानित हुए

साहित्यकार भगवानदास मोरवाल को एक लाख रुपए के ‘ज्ञानाब्धि राष्ट्रीय पुरस्कार’ से सम्मानित हुए 
गुजरात। शरदपूर्णिमा के पावन अवसर पर चापड़ , वडोदरा स्थित मेडिटेशन आश्रम में गुरुमैया डॉ. हरेश्वरीदेवी चैरिटेबल फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक भव्य समारोह में हिन्दी के प्रतिष्ठित साहित्यकार भगवानदास मोरवाल तथा गुजराती के सुविख्यात कवि डॉ. माधव रामानुज को ‘ज्ञानाब्धि राष्ट्रीय पुरस्कार’ से विभूषित किया गया। इस अवसर पर दोनों साहित्यकारों को गुरुमैया डॉ. हरेश्वरीदेवी के वरदहस्त से कुमकुम तिलक, श्रीफल, एक लाख रुपए का चेक, भव्य सम्मान-फलक, पुष्पगुच्छ और शाल प्रदान कर उनका भावपूर्ण अभिनंदन किया गया। गुरुमैया डॉ. हरेश्वरीदेवी की अध्यक्षता समारोह में राजपीपला स्थित बिरसा मुंडा ट्राइबल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. मधुकर एस. पाडवी, महाराजा सैयाजीराव विश्वविद्यालय, वडोदरा के हिंदी विभाग की अध्यक्ष डॉ. कल्पना गवली, अंजार आश्रम के संचालक महंत डाह्यालालजी, अधिवक्ता सोहिल गोडिया तथा जयरामभाई विशिष्ट अतिथियों के रूप में मंचासीन रहे। कवि गिरिराज ब्रह्मभट्ट ‘सरल’ ने संस्था की विविध सेवाभावी गतिविधियों का विस्तृत परिचय प्रस्तुत किया।
समारोह के प्रमुख प्रसंग में हिंदी साहित्य के लिए ‘ज्ञानाब्धि राष्ट्रीय पुरस्कार’ हिन्दी साहित्य को अब तक 13 उपन्यास देनेवाले वरिष्ठ कथाकार भगवानदास मोरवाल तथा गुजराती साहित्य के लिए अहमदाबाद के वरिष्ठ साहित्यकार तथा काव्य मनीषी माधव रामानुज को अर्पित किया गया। इस अवसर पर भगवानदास मोरवाल के नए तेरहवें उपन्यास ‘मानुस हौं तो’ का भी लोकार्पण हुआ। अपने प्रत्युत्तर में उन्होंने गुरुमैया तथा डॉ. हरेश्वरीदेवीजी चैरिटेबल फाउंडेशन के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।ज्योतिर्मय ट्रस्ट के अध्यक्ष हरीशभाई शाह ने अपनी विशिष्ट शैली में डॉ. माधव रामानुज का परिचय प्रस्तुत किया। डॉ. रामानुज ने सजल नयनों से गुरुमैया और संस्था के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। 
समारोह की साहित्यिक संपदा को समृद्ध करते हुए गुरुमैया की पाँच कृतियों ‘प्रभातिया’, ‘सत्य की किरणें’, ‘भक्ति रस’, ‘प्रयास से पूर्णता की ओर’ तथा ‘स्वधर्म की पहचान’ का भी लोकार्पण किया गया। विशिष्ट अतिथि और महाराजा सियाजीराव विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. कल्पना गवली ने गुरुमैया की पुस्तक ‘प्रयास से पूर्णता की ओर’ पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। बिरसा मुंडा ट्राइबल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. मधुकर एस. पाडवी ने अपने उद्बोधन में ‘सत्य की किरणें’ पर विस्तृत विचार व्यक्त किए। अध्यक्षीय उद्बोधन में गुरुमैया ने प्रभातियों और लोरियों की मधुर प्रस्तुति से वातावरण को भावमय बना दिया। कार्यक्रम का काव्यमय संचालन कवयित्री डॉ. राखी कटियार ने किया।कवि राजेश ब्रह्मभट्ट ‘राज’ ने आभार ज्ञापित करते हुए आयोजन से जुड़े सभी महानुभावों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। संकल्पगान के साथ समारोह का समापन हुआ।

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