उत्तर प्रदेश में नाई समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग तेजभाजपा की यूपी सह-प्रभारी प्रा. डॉ. मेधा कुलकर्णी एवं राज्यसभा सांसद से मिला प्रतिनिधिमंडल, 2027 विधानसभा चुनाव में उचित भागीदारी की मांग
उत्तर प्रदेश में नाई समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग तेज
भाजपा की यूपी सह-प्रभारी प्रा. डॉ. मेधा कुलकर्णी एवं राज्यसभा सांसद से मिला प्रतिनिधिमंडल, 2027 विधानसभा चुनाव में उचित भागीदारी की मांग
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में अति पिछड़ा वर्ग एवं नाई समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर युवा नेता सुशील कुमार शर्मा के नेतृत्व में समाज के प्रतिनिधियों ने भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व से मुलाकात कर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल ने भाजपा की उत्तर प्रदेश सह-प्रभारी एवं राज्यसभा सांसद प्रा. डॉ. मेधा कुलकर्णी सहित पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों के समक्ष नाई समाज की राजनीतिक, सामाजिक एवं संगठनात्मक भागीदारी का मुद्दा प्रमुखता से रखा। भाजपा ने सितंबर 2026 में उत्तर प्रदेश के लिए विनोद तावड़े को प्रभारी तथा प्रा. डॉ. मेधा कुलकर्णी सहित अन्य नेताओं को सह-प्रभारी नियुक्त किया है।
राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर उठाई आवाज
ज्ञापन में कहा गया कि उत्तर प्रदेश में नाई समाज लंबे समय से सामाजिक एवं राजनीतिक रूप से सक्रिय रहा है, लेकिन समाज के प्रतिनिधित्व को अपेक्षित राजनीतिक अवसर नहीं मिल पाए हैं। समाज की ओर से यह सवाल उठाया गया कि आजादी के बाद से प्रदेश की राजनीति में नाई समाज को विधानसभा, लोकसभा, संगठन तथा सरकार में अपेक्षित स्तर पर प्रतिनिधित्व क्यों नहीं मिल सका।
प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से वर्ष 2014 से अब तक समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की स्थिति की ओर भाजपा नेतृत्व का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि नाई समाज को केवल मतदाता के रूप में नहीं, बल्कि राजनीतिक भागीदार एवं नेतृत्वकर्ता समाज के रूप में भी उचित स्थान मिलना चाहिए।
2027 में निर्णायक भूमिका का दावा
ज्ञापन में दावा किया गया कि उत्तर प्रदेश की अनेक विधानसभा सीटों पर अति पिछड़ा वर्ग तथा नाई समाज की संख्या चुनावी दृष्टि से महत्वपूर्ण है। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में समाज की संख्या लगभग 5 हजार से 7 हजार से लेकर कई स्थानों पर 12 हजार से 17 हजार अथवा उससे अधिक हो सकती है।
समाज का कहना है कि यदि इन मतदाताओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सम्मानजनक भागीदारी मिलती है, तो आगामी विधानसभा चुनाव में यह वर्ग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
टिकट और संगठन में भागीदारी की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने भाजपा नेतृत्व से मांग की कि 2027 के विधानसभा चुनाव में सामाजिक एवं क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नाई समाज के योग्य, शिक्षित, संघर्षशील और जमीनी कार्यकर्ताओं को विधानसभा टिकट देने पर गंभीरता से विचार किया जाए।
इसके साथ ही समाज के योग्य कार्यकर्ताओं को पार्टी के संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां, विभिन्न आयोगों एवं बोर्डों में प्रतिनिधित्व तथा सरकार और संगठन के अन्य महत्वपूर्ण दायित्वों में अवसर देने की मांग भी रखी गई।
“समाज की आवाज को गंभीरता से लिया जाएगा”
प्रतिनिधिमंडल के अनुसार भाजपा के वरिष्ठ नेतृत्व ने नाई समाज द्वारा उठाए गए मुद्दों को गंभीरता से सुना और समाज की राजनीतिक एवं संगठनात्मक भागीदारी के संबंध में सकारात्मक आश्वासन दिया। नेतृत्व की ओर से भरोसा दिलाया गया कि अति पिछड़ा वर्ग एवं नाई समाज के हितों तथा उनकी राजनीतिक भागीदारी को लेकर पार्टी उचित स्तर पर विचार करेगी और आने वाले समय में सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
सुशील कुमार शर्मा ने कहा कि नाई समाज भाजपा का महत्वपूर्ण सामाजिक आधार रहा है और समाज की अपेक्षा केवल किसी एक पद या टिकट तक सीमित नहीं है। समाज चाहता है कि उसे लोकतांत्रिक व्यवस्था में उसकी सामाजिक संख्या, योगदान और राजनीतिक सक्रियता के अनुरूप सम्मानजनक प्रतिनिधित्व मिले।
“अब समाज को राजनीतिक नेतृत्व की आवश्यकता”
सुशील कुमार शर्मा ने कहा कि नाई समाज के युवा अब शिक्षा, व्यवसाय, सामाजिक सेवा और राजनीति के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में समाज की नई पीढ़ी चाहती है कि उसे राजनीतिक निर्णय प्रक्रिया में भी प्रभावी भागीदारी मिले।
उन्होंने कहा कि 2027 का विधानसभा चुनाव नाई समाज और अति पिछड़े वर्ग के लिए अपनी राजनीतिक ताकत को लोकतांत्रिक तरीके से सामने रखने का महत्वपूर्ण अवसर है। समाज भाजपा नेतृत्व से उम्मीद करता है कि पार्टी इस वर्ग की भावनाओं और राजनीतिक अपेक्षाओं को प्राथमिकता से समझेगी।
भाजपा के लिए भी महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भाजपा संगठन भी विभिन्न सामाजिक वर्गों तक अपनी पहुंच मजबूत करने पर जोर दे रहा है। हाल में पार्टी ने उत्तर प्रदेश के लिए प्रभारी और सह-प्रभारियों की नई टीम गठित की है तथा विभिन्न मोर्चों और सामाजिक समूहों के बीच संगठनात्मक संपर्क बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं।
ऐसे समय में नाई समाज द्वारा राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेतृत्व तक पहुंचना आगामी चुनाव के सामाजिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब देखना होगा कि भाजपा नेतृत्व 2027 के विधानसभा चुनाव में अति पिछड़े वर्ग और नाई समाज की राजनीतिक भागीदारी को किस रूप में आगे बढ़ाता है। समाज की नजर अब पार्टी के अगले कदम पर टिकी है।
Comments
Post a Comment