केंद्र सरकार की बेरुखी के खिलाफ 12 दिसंबर को रामलीला मैदान में राष्ट्रीय आक्रोश रैली
केंद्र सरकार की बेरुखी के खिलाफ 12 दिसंबर को रामलीला मैदान में राष्ट्रीय आक्रोश रैली
जौनपुर । अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने ऐलान किया कि सरकार की कर्मियों की मांगों के प्रति बेरुखी के खिलाफ कर्मचारी 12 दिसंबर को रामलीला मैदान दिल्ली में गरजेंगे और राष्ट्रीय आक्रोश रैली करेंगे। उन्होंने सरकार को चेताया कि 12 दिसंबर तक पुरानी पेंशन बहाली, मूल वेतन का 20 प्रतिशत या कम से कम पांच हजार रुपए प्रति माह अंतरिम राहत देने, दस की बजाय पांच साल में पे रिवीजन करने, टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने,ठेका संविदा कर्मियों को रेगुलर करने, निजीकरण पर रोक,18 महीने के बकाया डीए, डीआर को रिलीज करने , खाली पदों को स्थाई भर्ती से भर बेरोजगारों को रोजगार देने, चारों लेबर कोड्स की वापसी सहित अन्य मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की तो रैली में अगले आंदोलन का ऐलान कर दिया जाएगा। उन्होंने यह ऐलान शनिवार को पूजा पैलेस, जौनपुर (उ.प्र.) में आयोजित मंडलीय सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए किया। उन्होंने कहा कि रैली को लेकर कर्मियों में भारी उत्साह है और सरकार के खिलाफ नाराजगी है। मंडलीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय राज्य सरकारी पेंशनर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एसपी सिंह ने कहा कि रैली में पेंशनर्स भी हजारों की संख्या में शामिल होंगे। उप्र राज्य कर्मचारी महासंघ के राज्य अध्यक्ष कमल अग्रवाल ने कहा कि राज्य से दस हजार से ज्यादा कर्मचारी रैली में शामिल होंगे। जिसकी तैयारियों को लेकर सभी जनपदों में विभिन्न विभागों में कर्मचारी सभाएं आयोजित की जाएगी। मंडलीय सम्मेलन को प्राथमिक शिक्षक संघ के राज्य अध्यक्ष यशपाल सैनी व महामंत्री अनिल यादव ने कहा कि शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्य में उलझा दिया है। जिससे छात्रों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। सम्मेलन में उप्र फेडरेशन ऑफ मिनिस्ट्रियल सर्विस एसोशिएशन्स के राज्य अध्यक्ष उपेंद्र मणि त्रिपाठी व महामंत्री प्रदीप गुप्ता, उप्र लोक निर्माण विभाग मिनिस्ट्रियल एसोसिएशन के अध्यक्ष पद्मनाभ त्रिवेदी व महामंत्री जेपी पांडेय,उप्र कर्मचारी महासंघ लखनऊ मंडल के प्रभारी अफीफ सिद्दीकी मौजूद थे। इन्होंने डीए की बकाया तीन प्रतिशत और बोनस न देने पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सरकार कर्मियों की मांगों का हल करना तो दूर मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव कर्मचारी संगठनों से बातचीत करना भी आवश्यक नहीं समझते है। जिससे कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने सम्मेलन में बतौर मुख्य वक्ता संबोधित करते हुए ईपीएस 95 के सभी अंशदाताओं को परिभाषित पेंशन योजना के दायरे में लाने और 65,70,75 की आयु पर पेंशनर्स की बेसिक पेंशन में पांच प्रतिशत बढ़ोत्तरी करने की मांग को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने 31 दिसंबर,2025 तक के पेंशनर्स को आठवें पे कमीशन की सिफारिशों के अनुसार पेंशन रिवीजन करने के अधिकार से वंचित कर 25 मार्च,2026 के पेंशन वैलीडेशन एक्ट पास किया है। उन्होंने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार नव उदारवादी आर्थिक नीतियों को बड़ी तेजी से लागू कर रही है। खाली पदों को स्थाई भर्ती से भरने की बजाय नौजवानों को शोषण की भट्टी में झौंकने के लिए ठेका संविदा पर नियुक्त कर रही है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अगर उप्र सरकार ने कर्मचारियों के साथ बातचीत कर मांगों व समस्याओं का समाधान नहीं किया तो विधानसभा चुनाव में भाजपा को कर्मियों और पेंशनर्स तथा उनके परिजनों की भारी नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है।
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