मुंबई में 10 अक्टूबर को होगा ऐतिहासिक नाटक “वीर गोकुला” का मंचन
मुंबई में 10 अक्टूबर को होगा ऐतिहासिक नाटक “वीर गोकुला” का मंचन
मुंबई। ऐतिहासिक नाटक “वीर गोकुला” का मंचन 10 अक्टूबर 2026 को शाम 7:30 बजे मुक्ति कल्चरल हब, मॉडल टाउन, अंधेरी वेस्ट, मुंबई में होगा। यह प्रस्तुति उत्तर और दक्कन की एकता, सनातन चेतना और सर्वसमाज के भाईचारे को समर्पित है। नाटक में औरंगज़ेब के विरुद्ध वीर गोकुला के संघर्ष के साथ समर्थ रामदास जी के समाज को संगठित करने के संदेश को भी स्मरण किया गया है। इसके लेखक-निर्देशक देव फ़ौजदार हैं तथा आयोजन जय यूनाइटेड एवं नाट्यकिरन मंच द्वारा हरिओम इंटीरियर, श्री श्याम जन कल्याण सेवा संस्था (झज्जर) और एस एम एक्सप्रेस के सहयोग से किया जा रहा है। सन् 1665–1670 का वह दौर, जब मुगल सत्ता के दबाव और धार्मिक-सामाजिक उथल-पुथल से ब्रज की धरती व्याकुल थी, उसी समय एक साधारण किसान असाधारण प्रतिरोध का प्रतीक बनकर खड़ा हुआ—गोकुला जाट। न वह राजा था, न किसी विशाल साम्राज्य का सेनापति; उसकी शक्ति थी ब्रज की मिट्टी, किसानों का साहस और सर्वसमाज का विश्वास। नाटक के कथानक में दिखाया गया है कि जब अनेक शक्तियाँ औरंगज़ेब की सत्ता के आगे झुक रही थीं, तब गोकुला ने विभिन्न जातियों और समाजों को साथ लेकर चुनौती का बिगुल फूँका। उसके संघर्ष ने मुगल सत्ता को इतना विचलित किया कि स्वयं औरंगज़ेब को मथुरा उससे लड़ने के लिए आना पड़ा। समर्थ रामदास जी के संगठन और राष्ट्रचेतना के संदेश की स्मृति के साथ यह गाथा बताती है कि वीरता राजमुकुट की मोहताज नहीं होती—कभी-कभी एक किसान का संकल्प भी साम्राज्य की नींव हिला देता है। वीर गोकुला केवल इतिहास का पुनर्पाठ नहीं, बल्कि शौर्य, साहस, संगठन और भाईचारे की उस चेतना को मंच पर जीवंत करने का प्रयास है, जिसमें समाज की सामूहिक शक्ति ही सबसे बड़ा अस्त्र बनती है। दिल्ली के भारत मंडपम, जयपुर, मथुरा क्षेत्र, शिमला, पटना, बैकुंठपुर, बाजना, रोहतक, जट्टारी, बिसावर, भोपाल सहित देश के विभिन्न शहरों में अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों के बाद अब यह नाटक अपने 16वें मंचन के साथ मुंबई पहुँच रहा है। 10 अक्टूबर को मुक्ति कल्चरल हब में होने वाला यह मंचन उस किसान-योद्धा को नमन है, जिसने अपने स्वाभिमान और संस्कृति की रक्षा के लिए सत्ता के सामने झुकने के बजाय संघर्ष का मार्ग चुना—एक ऐसी गाथा, जिसमें मिट्टी की सौंधी खुशबू भी है और रणभूमि का गर्जन भी।इस नाटक के अनगिनत मंचनों और देव बेला के प्रयास का ही परिणाम है कि सरकार ने गोकुला की कहानी को देश की किताबों में जगह देने की सहमति व्यक्त की है
Comments
Post a Comment