दहेज़ जैसे अभिशाप को दूर करने हेतु समाज को आगे आना होगा-सुरेन्द्र शर्मा नंदवंशी
*समाज का हर व्यक्ति स्वयं बदले,फिर परामर्श दे-सुरेन्द्र शर्मा नंदवंशी*
जौनपुर
समाज समाज समाज आज जिसको देखो फेसबुक व्हाट्सएप पर समाजसेवी बनकर बैठा है। समझ में तब आता है जब आप अपनी बिटिया की शादी के लिए रिश्ता देखने जाओगे पहले तो बात बड़ी-बड़ी करते हैं फिर धीरे-धीरे डिमांड बढ़ना शुरू हो जाता है। यहां तक कि मैंने बहुत सारे ऐसे लोगों को देखा है कि लड़की देख लेंगे, गोद भराई भी कर लेंगे और बाद में लेनी देनी के चक्कर में रिश्ता तोड़ देंगे। ऐसी ऐसी क्रियाकलापों से बचें और जमीन पर आएं सेटेलाइट के माध्यम से संपर्क कम रखें। कुछ लोग तो ऐसे हैं जब उनके बच्चे कुछ बन जाते हैं तो वे 40 से 45 लड़कियां देख लेते हैं उसके बाद भी उनकी शादियां सेट नहीं होती। जानते हैं क्यों ? क्योंकि पढ़ी-लिखी नौकरी वाली लड़की के साथ-साथ धन भी चाहिए। समाज में 20% लोग ही दहेज नहीं मांगते 80% लोग इस रूढ़िवादी विचारधारा के पक्ष में खड़े हुए हैं । निवेदन करता हूं अपने अंदर विचार पैदा कीजिए स्टार्टिंग अपने घर से ही होगी। जब तक हम आप दहेज रूपी शब्द को दिमाग से बाहर नहीं निकालेंगे तब तक समाज को दलदल में दहेज पहुंचाता रहेगा। कुछ लोग समाज में अच्छे हैं कुछ लोग बहुत ही अच्छे हैं कुछ लोग परिवर्तन चाहते हैं कुछ लोग परिवर्तन होने नहीं देना चाहते।इसलिए समय अपने हाथों में हैं दहेज प्रथा को रोकिये और लडकियों की आत्महत्या,दहेज़ उत्पीड़न हत्या या अविवाहित रहने से बचाइये।
सुरेंद्र शर्मा नंदवंशी
उत्तर प्रदेश प्रधान महासचिव जननायक करपुरी ठाकुर सेवा समिति(रजि)
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