प्रो० राजेन्द्र सिंह (रज्जू भय्या) वि०वि० प्रयागराज में पं० दीनदयाल उपाध्याय जयन्ती के अवसर पर हुआ संगोष्ठी का आयोजन
प्रो० राजेन्द्र सिंह (रज्जू भय्या) वि०वि० प्रयागराज में पं० दीनदयाल उपाध्याय जयन्ती के अवसर पर हुआ संगोष्ठी का आयोजन
दिनांक:- 25/09/2026
प्रो० राजेन्द्र सिंह (रज्जू भय्या) वि०वि० प्रयागराज में पं० दीनदयाल उपाध्याय जयन्ती के अवसर पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसके संरक्षक मा० कुलपति डॉ. अखिलेश कुमार सिंह रहे। कार्यक्रम में मुख्यवक्ता श्रीमान रामाशीष जी (राष्ट्रीय संगठन मंत्री, गंगा समग्र) रहे। कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत पं० दीनदयाल उपाध्याय जी की प्रतिमा पर अतिथियों द्वारा माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन करके किया गया।
स्वागत वक्तव्य देते हुये प्रो० आशुतोष कुमार सिंह विभागाध्यक्ष, हिन्दी एवं अधिष्ठाता कला संकाय प्रमुख ने सभी का स्वागत करते हुये सभी अतिथियों के महत्व को बताया । भाई साहब के किये द्वारा किये गये कार्य का उल्लेख किया। प्रो० राजकुमार गुप्त, प्रो. विवेक कुमार सिंह का स्वागत करते हुये सभी के महत्वपूर्ण कार्यों का सराहना एवं स्वागत किया । पं दीनदायल उपाध्याय की दृष्टि कार्य दर्शन के बारे में बताते हुये शोध पीठ द्वारा किए जा रहे महत्वपूर्ण कार्यों से सभी को रूबरू कराया।
विषय प्रवर्तक के रूप में डॉ. प्रदीप कुमार त्रिपाठी के कहा की रामशीष जी दीनदयाल जी के दर्शन को समाज में उतार रहे हैं । देश दुनिया की समस्याओं का उल्लेख किया । दीनदयाल जी द्वारा दिए गए भाषण किस प्रकार मानव, समाज, व्यक्ति पर १९६० के दशक में विचार किया वह महत्वपूर्ण हैं । वह विकास को समाज के विकास के से जोड़ कर देखते है । पर्यावरण को लेकर किए गए विचार उल्लेखनीय हैं ।
मुख्य वक्ता के रूप में श्रीमान रामाशीष जी ने कहा कि दीनदयाल जी आर्थिक चिंतक थे । उनके समय में जनसंघ की स्थापना हुई । नेहरू मंत्रीमंडल से श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कश्मीर को लेकर इस्तीफा दिया । उन्होंने संघ की स्थापना, शिक्षा पर बातचीत की । देश की स्वतंत्रता के समय विचारों के महत्व को सभी से उल्लेखित किया । दीनदायल जी ने एकात्म मानव दर्शन को प्रस्तुत किया । पहले तन,मन बुद्धि की बात होती थी, दीनदयाल जी ने उसे आगे बढ़ते हुये आत्मा की बात सबसे ऊपर माना । ‘चिति’ के माध्यम से दीनदयाल जी ने आत्मा को प्रस्तुत किया एवं उसे राष्ट्र, एकात्म मानव दर्शन से जोड़ा । समझ ही चिति है वही राष्ट्र को एक करती है । राष्ट्र को अगर बचाना है तो चिति को जिंदा रखना है । एकात्म मानव दर्शन व्यक्ति, परिवार, समाज, राष्ट्र को एक मानता है । इन्होंने योग क्षेम का वर्णन किया ।
अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. विवेक कुमार सिंह ने रामाशीष जी के विचारों, कार्यों एवं व्यक्तित्व का उल्लेख किया । प्रो० राज कुमार गुप्त, कुलानुशासक ने रामाशीष जी भाई साहब द्वारा कही बातों की सराहना की । दीनदयाल जी ने संस्कृति को जीना सिखाया ।
धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अलका मिश्रा ने किया, उन्होंने दीनदयाल जी के बहुआयामी व्यक्तित्व का उल्लेख किया । कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. पीयूष मिश्र ने किया । कार्यक्रम में मुख्य रूप से सुनील जी भाई साहब, डॉ. अलका मिश्र, डॉ. प्रदीप कुमार द्विवेदी, डॉ. उत्कर्ष उपाध्याय, डॉ. दिव्या द्विवेदी, डॉ. गीतांजलि श्रीवास्तव एवं भारी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी एवं छात्रों की उपस्थिति रही ।
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