*.‘नारी की राजनैतिक चुनौतियां और नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ विषयक निबंध प्रतियोगिता के विजेता पुरस्कृत** .*नारी शक्ति वंदन अधिनियम लोकतांत्रिक व्यवस्था को सार्थकता प्रदान करने वाला: सर्वेश कुमार सिंह* *नारी की राजनैतिक चुनौतियां एवं नारी शक्ति वंदन अधिनियम विषय पर द्विदिवसीय संगोष्ठी सम्पन्न*
*.‘नारी की राजनैतिक चुनौतियां और नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ विषयक निबंध प्रतियोगिता के विजेता पुरस्कृत**
.*नारी शक्ति वंदन अधिनियम लोकतांत्रिक व्यवस्था को सार्थकता प्रदान करने वाला: सर्वेश कुमार सिंह*
*नारी की राजनैतिक चुनौतियां एवं नारी शक्ति वंदन अधिनियम विषय पर द्विदिवसीय संगोष्ठी सम्पन्न*
लखनऊ, 01 सितम्बर 2026। उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान, लखनऊ एवं पं. दीन दयाल उपाध्याय राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, राजाजीपुरम, लखनऊ के संयुक्त तत्त्वावधान में “नारी की राजनैतिक चुनौतियां एवं नारी शक्ति वंदन अधिनियम” विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं का पुरस्कार वितरण एवं संगोष्ठी मंगलवार को महाविद्यालय परिसर में हुई। उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान के निदेशक श्री सर्वेश कुमार सिंह के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य प्रो. डॉ. शिवानी श्रीवास्तव ने की तथा संचालन हिन्दी विभाग की प्रभारी प्रो. डॉ. सुरंगमा यादव ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां वीणापाणि की प्रतिमा के समक्ष अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर माल्यार्पण से हुआ।महाविद्यालय की छात्राओं वाणी वंदना प्रस्तुत की। बताते चलें कि द्विदिवसीय कार्यक्रम के प्रथम दिवस 31 अगस्त,2026 को
निबंध प्रतियोगिता आयोजित हुई, जिसमें लगभग 75 छात्राओं ने प्रतिभाग किया। इसका शुभारंभ प्राचार्य ने छात्राओं को कॉपी एवं पेन वितरित कर किया। प्रतियोगिता में एम.ए. प्रथम वर्ष की शिवानी रावत ने प्रथम, बी.ए. तृतीय वर्ष की वसुधा यादव ने द्वितीय तथा बी.ए. तृतीय वर्ष की संजू ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। विजेताओं को निदेशक श्री सर्वेश कुमार सिंह ने प्रमाण-पत्र, स्मृति-चिह्न एवं नकद राशि पुरस्कार स्वरूप प्रदान कर सम्मानित किया।
उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा, "भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति, सृजन और संवेदना का प्रतीक रही है। परंतु आवश्यक यह है कि नारी को केवल सम्मानित करने अथवा देवी मानने के स्थान पर उसे निर्णय लेने, नेतृत्व करने और स्वतंत्र रूप से अपनी बात रखने का समान अवसर मिलना चाहिए; तभी लोकतांत्रिक भावना को वास्तविक अर्थों में सम्मान प्राप्त होगा। नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को महत्त्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि संविधान के 106वें संशोधन के माध्यम से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटों के आरक्षण का प्रावधान किया गया है। यह अधिनियम महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाकर लोकतंत्र को अधिक सार्थक एवं समावेशी बनाएगा।"
कार्यक्रम संयोजक डॉ. रश्मिशील ने कहा कि यह अधिनियम आधी आबादी को राजनीतिक व्यवस्था में समान अवसर देने की दिशा में सार्थक कदम है, किंतु कानून के साथ परिवार, शिक्षण संस्थानों, राजनीति और समाज के स्तर पर मानसिकता में परिवर्तन भी आवश्यक है।
प्रो. डॉ. संजीव कुमार अग्रवाल ने कहा कि शिक्षा महिलाओं में अधिकार-बोध, निर्णय क्षमता और नेतृत्व कौशल विकसित करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने छात्राओं से अपने अधिकारों और संवैधानिक दायित्वों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया।
डॉ. साधना सिंह यादव ने कहा कि महिला सशक्तीकरण के लिए सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक निर्णय-प्रक्रिया में महिलाओं की स्वतंत्र एवं प्रभावी सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने छात्राओं से शिक्षा को अपनी शक्ति बनाकर राष्ट्र-निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. डॉ. शिवानी श्रीवास्तव ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य ज्ञानार्जन के साथ सामाजिक चेतना, संवैधानिक मूल्यों और उत्तरदायी नागरिकता का विकास करना भी है। महिलाओं की व्यापक राजनीतिक भागीदारी लोकतंत्र को अधिक प्रतिनिधिक, संवेदनशील और सशक्त बनाएगी। उन्होंने विजेता एवं प्रतिभागी छात्राओं को शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम के अंत में प्रो. डॉ. प्रीति वाजप्ये ने अतिथियों, प्राचार्य, प्राध्यापकों, आयोजकों एवं छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया। आयोजन ने महिला सशक्तीकरण, संवैधानिक चेतना और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रसार की दिशा में महत्त्वपूर्ण अकादमिक पहल का रूप लिया। इस अवसर पर महाविद्यालय की शिक्षकाएं, छात्राएं एवं भाषा संस्थान की ओर से श्रीमती अंजू सिंह, हर्ष अग्निहोत्री, ब्रजेन्द्र यादव इत्यादि उपस्थित रहें ।
सूचनार्थ एवं प्रकाशनार्थ समाचार प्रेषित।
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