*चालाक कौआ....!*
*चालाक कौआ....!*
परिवर्तन के दौर में....!
कौआ भी हुआ बहुत बेबाक़ है...
मानो या न मानो...मर्ज़ी आपकी..
पर सच यही है कि....!
वह कल भी चालाक था...
और...आज भी चालाक है....
आज....उसे बखूबी पता है....
कि मनुष्य....उसके साथ....
कर रहा मजाक है.....
उसे पता है कि...अब बच्चों को..
कोई नहीं सुनाता....
कौवे की कहानी..अपनी जुबानी..
उसे अच्छे से पता है कि....!
लोगों को....अच्छा नहीं लगता...
शिवाय पितरपख के दिनों के....!
घर की मुँड़ेर पर उसका आना....
अच्छा नहीं लगता लोगों को....
ऑंगन में..नन्हे-मुन्नों के हाथों से..
उसका चुपड़ी रोटी छीन ले जाना
अच्छा नहीं लगता लोगों को....!
उसके संकेत के बाद....
मेहमानों का आ जाना....
उसे मालूम है कि....!
सोशल मीडिया के इस दौर में....
नहीं सुहाता किसी को
किसी का बिन बताए....
या फिर बिन बुलाए....
अचानक से घर आ जाना.....
इतना ही नहीं मित्रों....!
पितर के रूप में.....खुद को....
भादों माह में पूजे जाने का....
आज भी...उसे अहसास है....
और मानता है वह भी...
कि इन दिनो में...उसकी स्थिति..
होती....बेहद ही खास है....
वैसे तो...इस पर उसे भी नाज़ है..
पर...यह मानना है उसका...
कि पितरपख में बुलाने में भी...
मनुष्य के मन में....जरूर...
कोई न कोई राज है....क्योंकि...?
विश्वास है उसका कि...आज तो..
ज़िन्दा माँ-बाप को भी....!
अच्छी परवरिश देने में....
मनुष्य को....लग रही लाज है...
इसीलिए मित्रों...आज के दौर में..
कौआ मनुष्य प्रजाति से....!
रहता बहुत ही नाराज है...और...
पितरपख में बुलाने पर भी...!
समाज को अब अपनी ओर से
हमेशा दे रहा डाज़ है....
यह अलग बात है कि....!
सृष्टि का स्वघोषित....!
सबसे बुद्धिमान प्राणी...मनुष्य...
उसे कह रहा है कि....!
कौआ प्रजाति बड़ी चालबाज़ है...
कौआ प्रजाति बड़ी चालबाज़ है...
रचनाकार....
जितेन्द्र कुमार दुबे
अपर पुलिस उपायुक्त, लखनऊ
Comments
Post a Comment