मुंबई के महालक्ष्मी रेस कोर्स से प्रारंभ होगी संत लोकेशानंद की श्री नारायण रथ यात्रा
मुंबई के महालक्ष्मी रेस कोर्स से प्रारंभ होगी संत लोकेशानंद की श्री नारायण रथ यात्रा
मुंबई। परमपूज्य संत लोकेशानंद महाराज श्री नारायण भक्ति पंथ (SNBP) के प्रवर्तक, दिव्य प्रेरणा-स्रोत एवं लोककल्याण के संकल्पकर्ता हैं। युवावस्था में ही उन्होंने श्री नारायण भक्ति पंथ की स्थापना कर भक्तों को भक्ति, संस्कार एवं व्यसन-मुक्ति का मार्ग दिखाया।इस पंथ में श्री नारायण भगवान की सेवा-पूजा का विशेष स्थान है। पंथ का प्रथम एवं प्रमुख तीर्थस्थल महाराष्ट्र राज्य के नंदुरबार जिले के शहादा में स्थित “श्रीश्रीनारायणपुरम् धाम” है, जहाँ शेषशायी नारायण भगवान का दिव्य विग्रह स्थापित है।भगवान का यह दिव्य स्वरूप पंचधातु निर्मित, लगभग 11 फुट ऊँचा एवं 21 टन भार का विश्व का प्रथम ऐसा श्रीविग्रह है। इस पावन मूर्ति के दर्शन मात्र से जन-जन को असीम धन्यता एवं आध्यात्मिक शांति की प्राप्ति होती है।आगामी यात्रा एवं दर्शन गुरुदेव की पावन यात्रा के क्रम में भक्तगण शेषशायी नारायण भगवान की दिव्य मूर्ति के दर्शन करेंगे। यह यात्रा श्री नारायण भक्ति पंथ की सेवा-पूजा परंपरा एवं जन-कल्याण के संकल्प को और सुदृढ़ करेगी।संत श्री लोकेशानंद महाराज के सान्निध्य में भक्तों को सत्संग, कथा एवं नारायण-भक्ति का अवसर प्राप्त होता है। उनका जीवन-मिशन भक्ति एवं संस्कार की दिशा देना, आध्यात्मिक जागरण फैलाना तथा व्यसनमुक्त समाज का निर्माण करना है।भारतवर्ष में ऐतिहासिक 12 वर्षीय आध्यात्मिक यात्रा श्री नारायण रथ यात्रा 21 एवं 22 जनवरी 2027 को मुंबई के महालक्ष्मी रेस कोर्स से प्रारंभ होगी
सद्गुरु लोकेशानंद महाराज, श्री नारायण भक्ति पंथ के संस्थापक, के दिव्य मार्गदर्शन में महाविष्णु की महायात्रा (जिसे श्री नारायण रथ यात्रा भी कहा जाता है) का शुभारंभ 21 और 22 जनवरी 2027 को महालक्ष्मी रेस कोर्स, मुंबई से किया जाएगा। यह 12 वर्षीय अखिल भारतीय यात्रा भारत के कोने-कोने तक भगवान महाविष्णु की अनुपम महामूर्ति को लेजाएगी। प्रथम चरण में पवित्र रथ महालक्ष्मी, सिद्धिविनायक, माटुंगा, अंधेरी ईस्ट, मुलुंड, ठाणे, कल्याण और नवी मुंबई इससे होकर गुजरेगा। इसके पश्चात् यात्रा महाराष्ट्र के सभी जिलों में जाएगी। इस चरण में अनुमानित 30 करोड़ भक्तों एवं और भी अधिक लोगों को महामूर्ति के साक्षात् दर्शन का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त होगा। दिव्य महामूर्ति के विषय में यह भगवान महाविष्णु की शेषशायी स्वरूप में विश्व की एकमात्र ठोस पंचधातु महामूर्ति है। पूर्णतः ठोस एवं शुद्ध पंचधातु से निर्मित लंबाई: 15 फीट; शेषनाग के फन की ऊँचाई: 7 फीट, अनुमानित भार: 9 टन। इसमें स्वर्ण (12 किलो), चाँदी (300 किलो), ताँबा (21 टन), जिंक (9 टन) एवं अन्य पवित्र धातुएँ सम्मिलित हैं । 30 कुशल कारीगरों द्वारा 12 महीनों में लगभग ₹30 करोड़ की लागत से निर्मित है।
Comments
Post a Comment