हिंदी दिवस पर गीत ग़ज़ल की गूँज
हिंदी दिवस पर गीत ग़ज़ल की गूँज
मुंबई: श्री एम. डी. शाह महिला कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड कॉमर्स (स्वायत्त), मलाड (पश्चिम), मुंबई में हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में हिंदी विभाग द्वारा ‘गीत-ग़ज़ल प्रस्तुति’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य हिंदी भाषा एवं साहित्य के प्रति विद्यार्थियों में रुचि उत्पन्न करने के साथ-साथ गीत और ग़ज़ल की समृद्ध काव्य-परंपरा से उन्हें परिचित कराना था।
कार्यक्रम में महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. दीपा शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने कहा की भाषा को आगे बढ़ाना और समृद्ध करने का कार्य हम सबका है, हमें अपने देश की प्रत्येक भाषा का सम्मान करना चाहिए I उपप्राचार्या शुभा आचार्य ने हिंदी को जोड़ने वाली भाषा कहा और विधार्थियों को सन्देश दिया की वे अपनी भाषा के साहित्य को अधिक से अधिक पढ़े और उसे समझने का प्रयास करें I कार्यक्रम की प्रस्ताविकी पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. महेंद्र गुहा सर द्वारा दी गई जिसमें उन्होंने हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओ की समृद्धता पर प्रकाश डाला I डॉ. हीरल शादीजा ने हिंदी दिवस के महत्व पर अपनी बात रखी I कार्यक्रम में प्रतिष्ठित गीतकार जाकिर हुसैन ‘रहबर’, कवि एवं गीतकार श्री रवि यादव तथा श्री कल्पेश यादव ,उषा जी ने अपनी सुमधुर गीत एवं ग़ज़ल के माध्यम से उपस्थित श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। उनकी रचनाओं में प्रेम, संवेदना, जीवनानुभव और सामाजिक सरोकारों की विविध छवियाँ दिखाई दीं। गीत और ग़ज़ल की प्रभावशाली प्रस्तुतियों ने सभागार में साहित्यिक एवं संगीतात्मक वातावरण का निर्माण कर दिया। इस अवसर पर वक्ताओं ने हिंदी भाषा की व्यापकता, उसकी सांस्कृतिक भूमिका तथा गीत और ग़ज़ल की लोकप्रियता पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम से यह संदेश दिया गया कि हिंदी केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संवेदना, संस्कृति और सामूहिक स्मृति को अभिव्यक्त करने वाली सशक्त भाषा है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. चंपा मासीवाल, सहायक प्राध्यापिका , हिंदी विभाग (पी.जी. विभाग) ने अत्यंत प्रभावशाली एवं साहित्यिक शैली में किया। उनके मंच-संचालन में हिंदी भाषा की गरिमा, काव्य-सौंदर्य और गीत-ग़ज़ल की संवेदनात्मक परंपरा का सुंदर समन्वय समन्वय दिखायी दिया ।
प्रोफेसर डॉ. तमसा आचार्य, पर्यवेक्षक प्रोफेसर डॉ. सुधा देशपांडे, डॉ. भगवतीप्रसाद उपाध्याय, डॉ. मनोज मिश्रा तथा डॉ. रविंद्र कांबले सहित महाविद्यालय के प्राध्यापकगण एवं विद्यार्थियों ने कार्यक्रम में भाग लिया I गीत और ग़ज़ल के माध्यम से हिंदी साहित्य के प्रति उनकी रुचि और रचनात्मक संवेदना को नया आयाम मिला। कार्यक्रम का समापन साहित्यिक गरिमा एवं उल्लासपूर्ण वातावरण में हुआ।
Comments
Post a Comment