संजय जीवणलाल शाह और अल्पा संजय शाह के हाथों गौमाता प्रतिमा का अनावरण

संजय जीवणलाल शाह और अल्पा संजय शाह के हाथों गौमाता प्रतिमा का अनावरण
मुंबई। अगाशी तीर्थधाम श्री समवसरण महामंदिर के प्रेरणादाता, लब्धिधारी प.पू. आचार्यश्री विजय दक्षसूरिश्वरजी महाराज साहेब की पावन परंपरा के पट्टालंकार, लोकप्रिय श्रमण सम्राट, सुप्रसिद्ध प्रवचनकार, ज्योतिषविशारद तथा श्री सूरिमंत्र–पार्श्व–पद्मावती महादेवी के साधक प.पू. आचार्यश्री विजय प्रभाकर सूरिश्वरजी महाराज साहेब की पावन निश्रा में गौसेवा, जीवदया और भारतीय संस्कृति के पवित्र संदेश को उजागर करने वाला भव्य समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर श्री दक्ष कामधेनु गोकुल गौशाला, समवसरण महामंदिर, चलापेठ रोड, पार्श्व नगर, अगाशी तीर्थ, वाया विरार, जिला पालघर, मुंबई, महाराष्ट्र में भव्य गौमाता प्रतिमा का अनावरण किया गया। भव्य गौमाता प्रतिमा का अनावरण श्री वर्धमान श्रुतगंगा के अध्यक्ष-ट्रस्टी संजय जीवनलाल शाह तथा जैन अल्पसंख्यक सेवा संस्था के महिला विभाग की अध्यक्षा अल्पा संजय शाह के हाथों किया गया। इस अवसर पर पू. मुनिप्रवर श्री महापद्मविजयजी महाराज साहेब, पू. मुनिराज श्री श्रीपद्मविजयजी महाराज साहेब तथा पू. साध्वीजी श्री तत्त्वदर्शनाश्रीजी म.सा. सहित संतवृंद की पावन उपस्थिति रही। संतवृंद की उपस्थिति से संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक, पवित्र और भक्तिमय बन गया। धार्मिक श्रद्धा, भक्तिभाव और भारतीय संस्कृति के शाश्वत मूल्यों के साथ आयोजित इस समारोह में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं तथा गणमान्य अतिथियों ने गौमाता के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। गौसेवा और जीवदया के संदेश को समाजजीवन में और अधिक सुदृढ़ बनाने के संकल्प के साथ आयोजित यह आयोजन सभी के लिए प्रेरणादायी बना।संतवृंद ने गौसेवा, जीवदया और करुणाभाव को भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग बताते हुए कहा कि जीवमात्र के प्रति करुणा, सेवा और संरक्षण की भावना ही सच्चे अर्थों में मानवता की पहचान है। गौमाता का सम्मान केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, पर्यावरण, जीवदया और भारतीय संस्कृति के मूल्यों से जुड़ा पवित्र संदेश है।
संजय जीवनलाल शाह ने कहा कि गौसेवा और जीवदया भारतीय संस्कृति की प्राचीन एवं सनातन परंपरा है। गौमाता के प्रति सम्मान और जीवमात्र के प्रति करुणा की भावना नई पीढ़ी में भी जागृत रहे, इसके लिए ऐसे आध्यात्मिक और सेवाभावी आयोजनों का निरंतर आयोजन समय की आवश्यकता है। भव्य गौमाता प्रतिमा का अनावरण केवल धार्मिक समारोह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गौसेवा, जीवदया, करुणा और भारतीय संस्कृति के शाश्वत संस्कारों को समाज तक पहुंचाने वाला प्रेरणादायी अभियान बन गया। इस अवसर पर गाय को भारत की संस्कृति और समृद्धि का आधार बताते हुए गौसेवा को महान सेवा के रूप में सराहा गया। संतवृंद की पावन निश्रा, धार्मिक भावना और श्रद्धालुओं की उपस्थिति से संपूर्ण कार्यक्रम भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ।

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