डाॅ. दिनेश चन्द्र सिंह : एक जीवन्त व्यक्तित्व

डाॅ. दिनेश चन्द्र सिंह : एक जीवन्त व्यक्तित्व  
04 मई 2026 को प्रातः काल व्हाट्सएप्प पर स्थानांतरण की ख़बर पढ़ यह विचार तत्क्षण मन में आया कि, यह बस एक जिलाधिकारी का जनपद से जाना नही बल्कि अभिभावक सदृश अत्यंत व्यवहार कुशल,उदारमना, सहज आत्मीयतापूर्ण व्यवहार करने वाले सुहृद का स्थानांतरण  है। 
दिनांक 14 सितंबर 2024 से 04 अप्रैल 2026 तक जिलाधिकारी जौनपुर डाॅ. दिनेश चन्द्र सिंह आईएएस का कार्यकाल रहा। डीएम के पद पर रहते हुए स्वयं के आदर्शों, मूल्यों और मानकों के अनुरूप कार्य करने वाले संवेदनशील लोकसेवक की भूमिका देखी, जिसमें पाया कि दिखाने और पहनने के दो अलग जोड़े नहीं है यानी कथनी और करनी, आदर्श और व्यवहार, चिंतन और आचरण का सिर्फ एक ही प्रतिमान देखा हैं, जो आपके साहित्यिक पुस्तकों एवं प्रशासनिक कार्यों में समान रूप से दिखाई पड़ी।
 आप में जहाॅं कवि हृदय की भांति सर्जनशक्ति की उर्वर भूमि एवं रससिक्त मन है।जो स्वयं आनंद में  रहता ही है, साथ ही संपर्क  में आने वाले को भी आनंदित कर देता है। 
शैक्षणिक योग्यता में आप रसायन विज्ञान में परास्नातक , पी-एच.डी. एवं एलएलबी की उपाधि इलाहाबाद विवि से प्राप्त किए हैं  लेकिन अनेक बार सार्वजनिक मंचों से  कवि राजेश जोशी, महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, गोस्वामी तुलसीदास, कबीरदास की पंक्तियाॅं दृष्टांत  स्वरूप देते हुए सुना हैं। 
जितना ऊॅंचा पद उससे कही अधिक  गहरा दिलों में स्थान बनाया, अपने मृदुल व्यवहार, त्वरित न्याय, सतत पर्यवेक्षण, शासन की मंशानुरूप तय समय-सीमा से पहले कार्य पूर्ण करना प्रमुख कारण रहा। आपके आह्वान पर जनपद के बदलापुर तहसील की पीली नदी का उद्धार हो या जनपद की सीवी रैंकिंग में सुधार एवं महाकुम्भ की भीड़ को सकुशल नियंत्रित कर उनके भोजन ,रहन सहन इत्यादि की समुचित व्यवस्था तथा प्रतियोगी परीक्षा में विभिन्न जनपदों से आए अभ्यर्थियों के मध्य मिष्टान्न एवं अल्पाहार वितरित करना तथा नवनियुक्त छात्रों को अंगवस्त्र से सम्मानित करना एवं आफिस में फरियाद लेकर आए निर्बल जन से भी विशिष्ट जन की तरह पूर्ण आत्मीयता से मिलना तथा उनके समस्या निवारण होने तक अधीनस्थ अधिकारियों से फीडबैक लेना,इन सभी घटनाक्रमों का जनपद साक्षी है।ज्ञात हो कि लखनऊ में देश के गृहमंत्री अमित शाह जी के हाथों उ.प्र. के चुने गए पाॅंच जनपदों में से एक जौनपुर जनपद का नाम मुख्यमंत्री युवा उद्यम ऋण वितरण कार्य में शीर्ष पर आपके ही प्रयासों कारण आ पाया। यह पुरस्कार सिर्फ जनपद जौनपुर के जिलाधिकारी डाॅ.दिनेश चंद्र सिंह ही नही प्राप्त कर रहे थे, समस्त जनपदवासी गौरवशाली क्षण को टीवी या मोबाइल पर देख सुन रहे थे, देश विदेश में रह रहे जौनपुर के प्रवासीजन आपकी कर्मठता को वही से नमन कर रहे थे। एक उदाहरण में बक्शा की मूल निवासी प्रिया मिश्रा जोकि वर्तमान में मास्को, रूस में रहती हैं वो भी सोशल मीडिया पर पुरस्कार की खबर सांझा की, ऐसे अनगिनत लोग खुशी मनाएं।
हमारी पहली भेंट दि. 04 अक्टूबर 2024 को कलेक्ट्रेट स्थित आफिस में हुई, इस मौके पर पत्रकार रामदयाल द्विवेदी अधिष्ठाता पूर्वांचल बुक डिपो द्वारा डाॅ.सत्य नारायण दुबे 'शरतेन्दु' कृति 'जौनपुर का गौरवशाली इतिहास' पुस्तक डीएम जौनपुर डाॅ. दिनेश चन्द्र सिंह आईएएस को भेंट किए। फिर भेंट का सिलसिला निरंतर जारी रहा। कुछ दिनों बाद हमारे आग्रह पर रामदयाल द्विवेदी जी ने तत्कालीन पुलिस अधीक्षक उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड अमित श्रीवास्तव आईपीएस  की सेतु प्रकाशन से प्रकाशित  'सिराज ए दिल जौनपुर' पुस्तक भेंट की और  हमारे फ़ोन से वार्ता कर डीएम सर पुस्तक के संदर्भ में प्रतिक्रिया भी व्यक्त किए।कालांतर में महाकवि रूपनारायण त्रिपाठी के यशस्वी पुत्र एडवोकेट रामकृष्ण त्रिपाठी ने पितृ कृति कालजयी महाकाव्य एवं रूप रचनावली भेंट की। वही हरियाणा में असि.प्रो. पद पर चयनित दोनों भाई डाॅ.शिवम सिंह , शुभम सिंह को जनपद का गौरव बढ़ाने पर बधाई दिए इस अवसर पर डाॅ.माधवम सिंह असि. प्रो. ने 'थूंकना मना है' पुस्तक भेंट की।
दिनांक 08 अक्टूबर 2025 को 'कर्मकुम्भ' के रचनाकार डाॅ.दिनेश चन्द्र सिंह आईएएस द्वारा पुस्तक की हस्ताक्षरित प्रति हमें प्राप्त हुई। हालांकि इससे पहले की प्रकाशित पुस्तक 'काल प्रेरणा' एवं 'कर्म प्रेरणा' हम पढ़ चुके थे। जिस कारण रचनाकार डाॅ.दिनेश चंद्र जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व से प्रभावित हुए। मुझे 'मैं हिमालय हूॅं ' शीर्षक कविता पढ़ते समय ए.अरविंदाक्षन की टिप्पणी याद हो आती है कि, "एक कवि अपने देश को लिखता है, अपने देश के साथ-साथ कवि अपने समय को भी लिखता है। फिर वह कवि अपनी भाषा को लिखता है और ये तीनों मिलकर उसे समावेशी बना देते हैं।" कर्मकुम्भ आद्योपांत पढ़ने पर यह कथन उचित जान पड़ा। यह पुस्तक जीवन के अनुभव एवं भोगे हुए यथार्थ को उद्घाटित करती हैं। इसमें वायवी उड़ान नहीं है और ना ही कल्पना का पुलिंदा। यथार्थ की जमीन पर चलते हुए हवाबाजी करने से बचते हैं।

एक बार आफिस में देखा की  घरेलू स्त्री अपनी खतौनी सही कराने के लिए जिलाधिकारी जौनपुर के सामने प्रार्थना पत्र लेकर खड़ी है, तो मेरे मन में प्रोफेसर श्रीप्रकाश शुक्ल जी की निम्न पंक्तियां आई -

" एक स्त्री घर से निकलते हुए भी नहीं निकलती,
 वह जब भी घर से निकलती है, 
 अपने साथ घर की पूरी खतौनी लेकर निकलती हैं ,
और 
पूजा घर में बैठी हुई स्त्री जब भी पूजा करने बैठती है,
एक पूरा ब्रह्मांड अपने भीतर लेकर बैठती है।"

 प्रार्थिनी की समस्या का समाधान किए तथा केन्द्र सरकार व प्रदेश सरकार द्वारा संचालित अन्य योजनाओं से लाभान्वित किए। ऐसे में एक साहित्यकार की मनःस्थिति को देखा जो प्रशासनिक पद पर रहते हुए संवेदनशील है और हर किसी के मन को पढ़ता है। इस कार्य से संवेदना का वास्तविक स्वरूप दिखाई पड़ता है। वही अण्डमान विश्वविद्यालय में चयनित हिन्दी की असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ. प्रतिभा सिंह 09 मार्च 2026 को लोकप्रिय जिलाधिकारी जौनपुर से भेंटकर उनके बहुमुखी प्रतिभा की मुक्त कंठ से प्रशंसा सोशल मीडिया पर करती है।
अतः "महिमा कहिअ कवन बिधि तासू " की स्थिति हैं।
  अधर्म का नाश होगा, धर्म की विजय होगी शीर्षक अध्याय में सीज फायर उल्लंघन पर स्पष्ट विचार,धारदार टिप्पणी उल्लेखनीय है। 'वृक्षारोपण,गौ सेवा और पशु पक्षी सेवा के समर्पित एक वैवाहिक वर्षगांठ' शीर्षक अध्याय में 12 मई 2025 को वैवाहिक जीवन के 30 वर्ष पूर्ण होने पर गौशाला, तीर्थस्थल, वृक्षारोपण कर मनाया हैं, का सविस्तार व सचित्र वर्णन किया है। पशु पक्षियों के प्रति प्रेम व नूतन तरीके से जन्मदिन एवं मांगलिक कार्यक्रम की वर्षगांठ मनाने का संदेश देते हैं। गौशाला में भूसा दान करने पर 'पुण्य की एफडी' अपने हाथों प्रदान करते हैं तथा प्रेस वार्ता में घर की छतों पर पानी दाना रखने तथा अपनी स्वरचित कविता सुनाते हैं, जिस पर जौनपुर के कवि रामजीत मिश्र के ग़ज़ल संग्रह दास्तान ए उल्फ़त की पंक्ति -

" सूरज, चाॅंद, सितारे,पंछी, दरिया और शजर कितने,
लेकिन इंसाॅं की आंखों में बैठा चोखा पैसा हैं! "

आदरणीय डाॅ. दिनेश चन्द्र सिंह जी एक उदारवादी, सरस हृदय,ईश्वर के प्रति आस्थावान व्यक्ति हैं। पेशे से प्रशासनिक अधिकारी होते हुए भी काल प्रेरणा, कर्म प्रेरणा एवं कर्मकुम्भ रचनाओं से साहित्यप्रेमियों के मध्य सदैव चर्चित है और रहेंगे।
ऐसे में भारतीय प्रशासनिक अधिकारी डाॅ. दिनेश चन्द्र सिंह को अपने वर्तमान को दर्ज करते हुए एक साहित्यकार के रूप में पढ़ें जाने की जरूरत है। वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार कमलेश पाण्डेय जी द्वारा सुसंपादित यह पुस्तक एक साहित्यकार को समग्रता से समझने में महत्त्वपूर्ण हैं।

अश्वनी कुमार तिवारी 
शोधार्थी वीर बहादुर सिंह पूर्वाञ्चल विश्वविद्यालय, जौनपुर,उ.प्र.

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