जय हो महान् सम्राट पृथ्वीराज जी शत् शत् नमन !----डाॅ.दिनेश चन्द्र सिंह आईएएस, लखनऊ
जय हो महान् सम्राट पृथ्वीराज जी शत् शत् नमन !
----डाॅ.दिनेश चन्द्र सिंह आईएएस,
लखनऊ
16.05.2026
महान् सम्राट पृथ्वीराज चौहान (पृथ्वीराज तृतीय) 12वीं सदी के प्रतापी, शूरवीर, पराक्रमी, साहसी,अतुलनीय बल, अदम्य साहस, अपराजेय संकल्प शक्ति, महान् सम्राट एवं एक वीर हिन्दू क्षत्रिय राजा, भारत के अंतिम सम्राट, भारत में पृथ्वीराज चौहान के बाद कोई सम्राट नहीं तथा अपितु राजा एवं शासक हुए हैं।अपनी वीरता,युद्ध कौशल और मोहम्मद गोरी के खिलाफ तराइन के युद्धों (1191- 1192) के लिए प्रसिद्ध है, की जन्म जयंती पर शत् शत् नमन।
पृथ्वीराज चौहान का जन्म 16 मई 1166 ई. को हुआ था एवं 1178 ई. में 12 वर्ष की आयु में शासक बने और अजमेर को राजधानी बनाई । शब्दवेधी बाण के सिद्धहस्त योद्धा के रूप में निम्नलिखित पंक्तियां प्रसिद्ध हैं -
"चार बांस चौबीस गज अंगुल अष्टप्रमाण।
ता ऊपर सुल्तान है मत चूको चौहान।।"
जिनके शौर्य और पराक्रम ने दसकों तक मातृभूमि पर शत्रुओं का कदम नहीं पढ़ने दिया। मातृभूमि और सनातन धर्म संस्कृति के रक्षक, शब्दवेधी बाण से मोहम्मद गौरी का वध करने वाले ,वीर शिरोमणि,हिन्दू हृदय सम्राट पृथ्वीराज चौहान की जयंती पर कोटि-कोटि नमन! चौहान वंश में जन्म होने के कारण अपने पूर्वजों के शौर्य को प्रणाम तथा राष्ट्रभक्ति ,राष्ट्र रक्षा के जीवन दर्शन की प्रेरणा के लिए पृथ्वीराज चौहान जी के चरणों में नमन ! राष्ट्र पराक्रमी सम्राट के प्रति आस्था एवं श्रद्धावान् हैं।
डाॅ. दिनेश चन्द्र सिंह आईएएस
16.05.2026
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