*डिजिटल लर्निंग भविष्य की शिक्षा का सशक्त स्तंभ- प्रो. राम आसरे सिंह*


*डिजिटल लर्निंग भविष्य  की शिक्षा का सशक्त स्तंभ- प्रो. राम आसरे सिंह*
 शिक्षक शिक्षा विभाग, तिलकधारी स्नातकोत्तर महाविद्यालय के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय शैक्षिक संगोष्ठी "राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में डिजिटल अधिगम: अवसर, चुनौतियाँ एवं प्रभाव" का उद्घाटन सत्र अत्यंत गरिमामय, सुव्यवस्थित एवं ज्ञानवर्धक वातावरण में सम्पन्न हुआ। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के आलोक में डिजिटल अधिगम की बदलती प्रवृत्तियों, उसके अवसरों, चुनौतियों एवं शैक्षणिक प्रभावों पर गहन विमर्श करना है।
उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. राम आसरे सिंह उपस्थित ने उद्घाटन उदबोधन में कहा कि उन्होंने डिजिटल अधिगम के वर्तमान परिदृश्य, उसकी व्यापक संभावनाओं तथा भविष्यगत अवसरों का सम्यक् विश्लेषण प्रस्तुत किया। इस क्रम में उन्होंने DOI (Digital Object Identifier), ISSN (International Standard Serial Number) तथा Plagiarism जैसे महत्वपूर्ण अकादमिक मानकों की आवश्यकता एवं उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि गुणवत्तापूर्ण शोध, प्रामाणिकता एवं अकादमिक नैतिकता, डिजिटल युग में उच्च शिक्षा की आधारशिला हैं।
 विभागाध्यक्ष प्रो. सुधांशु सिन्हा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में डिजिटल अधिगम की प्रासंगिकता, उसके बहुआयामी शैक्षणिक प्रभाव तथा शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में हो रहे संरचनात्मक परिवर्तनों का विश्लेषण किया।
प्रोफेसर अजय कुमार दुबे ने डिजिटल शिक्षा के व्यावहारिक पक्ष, प्रशासनिक अनुभवों तथा उच्च शिक्षा संस्थानों में इसके प्रभावी क्रियान्वयन से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं को रेखांकित किया। उन्होंने विशेष रूप से शिक्षकों के सतत व्यावसायिक विकास (Continuous Professional Development) एवं डिजिटल संसाधनों के समुचित उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
संगोष्ठी के विषय प्रवर्तन के अंतर्गत डॉ. प्रशान्त कुमार पाण्डेय ने डिजिटल लर्निंग की अवधारणा, कक्षा शिक्षण में ICT एकीकरण, TPACK फ्रेमवर्क, गेमीफिकेशन तथा एडाप्टिव लर्निंग जैसी समकालीन शैक्षणिक प्रवृत्तियों का विश्लेषण प्रस्तुत किया, जो संगोष्ठी के बौद्धिक विमर्श की दिशा निर्धारित करने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ।
आयोजन सचिव डॉ. अरविन्द कुमार सिंह एवं श्री राय साहब यादव ने अपने संबोधन में डिजिटल टूल्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तथा नवीन शैक्षिक तकनीकों की भूमिका पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर शिक्षक शिक्षा विभाग के  श्रीमती निधि सिंह, डॉ. अंजू श्रीवास्तव एवं डॉ. सीमांत राय ने भी अपने विचार व्यक्त किए और संगोष्ठी के विषय को समृद्ध किया।
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. वैभव सिंह द्वारा किया गया, जबकि संगोष्ठी की संयोजिका प्रो. श्रद्धा सिंह ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार ज्ञापित किया।
इस संगोष्ठी में बी.एड. एवं एम.एड. के विद्यार्थियों के साथ-साथ शोधार्थियों की उल्लेखनीय सहभागिता रही, जिससे अकादमिक वातावरण अत्यंत सजीव एवं संवादपरक बना रहा। उद्घाटन सत्र ने संगोष्ठी के आगामी सत्रों के लिए एक सुदृढ़ बौद्धिक आधार एवं सार्थक दिशा प्रदान की।

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