कैबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने किया पद्म भूषण पंकज उधास चौक और भित्तिचित्र स्मारक का उद्घाटन
कैबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने किया पद्म भूषण पंकज उधास चौक और भित्तिचित्र स्मारक का उद्घाटन
मुंबई। ग़ज़ल गायक पद्मभूषण पंकज उधास की 75वीं जयंती के अवसर पर रविवार को पेडर रोड स्थित स्टर्लिंग अपार्टमेंट के सामने वाले चौक का आधिकारिक रूप से “पद्मभूषण पंकज उधास चौक” नामकरण किया गया। साथ ही कैबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा के हाथो इस चौक पर स्थापित पंकज उधास के भित्तिचित्र स्मारक (म्युरल) का उद्घाटन भी किया गया। इस अवसर पर उधास परिवार, वरिष्ठ गायक-संगीतकार तथा बड़ी संख्या में उनके प्रशंसक उपस्थित थे।
इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध गायक हरिहरन,सोनू निगम, पापोन तथा संगीतकार-गायक सलीम मर्चंट के साथ समाजसेविका श्रीमती मंजू जी लोढ़ा भी उपस्थित थीं।बइस अवसर पर कैबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने कहा, “पेडर रोड क्षेत्र में पंकज उधास का लंबे समय तक निवास रहा। उनके परिवार की इच्छा थी कि इस परिसर में उनकी स्मृति में कोई स्थायी स्मारक बनाया जाए। इसके लिए मैंने और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने प्रयास शुरू किए थे। आदरणीय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस प्रस्ताव को तत्काल मंजूरी दी। उनके मार्गदर्शन और मुंबई महानगरपालिका के सहयोग से यह भित्तिचित्र स्मारक तैयार किया गया है। यह चौक अब संगीत और ग़ज़ल प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा। स्मारक में पंकज उधास के अमर गीतों के लिए क्यूआर कोड भी दिया गया है, जिसके माध्यम से नागरिक उनकी ग़ज़लों का आनंद ले सकेंगे।”
कार्यक्रम में पढ़कर सुनाए गए संदेश में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “पंकज उधास की मधुर और संवेदनशील आवाज़ ने भारतीय संगीत को समृद्ध किया और ग़ज़ल गायकी को वैश्विक पहचान दिलाई। ‘चिट्ठी आई है’ जैसे उनके गीत आज भी पीढ़ियों के दिलों में जीवित हैं।”
गायक हरिहरन ने भी पंकज उधास को याद करते हुए कहा, “पंकजजी ने ग़ज़ल को आम लोगों तक पहुँचाया। उनकी कई ग़ज़लें आज भी लोगों की ज़ुबान पर हैं।”
गायक पापोन ने पंकज उधास के सरल स्वभाव को याद करते हुए कहा, “मैं उनसे उम्र में बहुत छोटा था, फिर भी वे मुझे हमेशा आदरपूर्वक ‘आप’ कहकर संबोधित करते थे।” संगीतकार हृदयनाथ मंगेशकर के पुत्र आदिनाथ मंगेशकर ने उधास और मंगेशकर परिवार के दशकों पुराने संबंधों को याद किया। उन्होंने कहा, “मेरा पहला फोटो लता मंगेशकर जी की गोद में है और उसमें पंकजजी भी मौजूद हैं। हमारे घर का गणेशोत्सव उनकी उपस्थिति के बिना अधूरा माना जाता था।”
गायक सोनू निगम ने भी अपने बचपन की यादें साझा करते हुए कहा, “मेरी माँ हमेशा पंकज उधास के गीत सुना करती थीं। बाल कलाकार रहते हुए मैंने उनकी ग़ज़लों के शब्द और धुन दोनों याद कर लिए थे।”
चार दशकों से अधिक लंबे करियर में पंकज उधास ने 50 से अधिक एल्बम और 1,000 से ज्यादा गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। संगीत क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2006 में पद्मश्री और वर्ष 2025 में पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित किया गया था।
पंकज उधास की यादों से पेडर रोड क्षेत्र भावुक माहौल में डूबा हुआ था। उन्होंने भारतीय ग़ज़ल को सात समंदर पार तक पहुँचाया और उनके प्रशंसक केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी बड़ी संख्या में हैं। समाजसेविका मंजू लोढ़ा ने कहा कि इस क्षेत्र में ऐसे महान गायक का स्मारक और चौक होना गर्व की बात है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी आवाज़ की कोमलता और विरह की भावना आने वाली कई पीढ़ियों तक संगीत प्रेमियों के दिलों में गूंजती रहेगी।
Comments
Post a Comment