योगासन......! (हास्य कविता)
योगासन......! (हास्य कविता)
बार-बार देकर भाषन....!
गुरुवर ने सिखलाया....
जबरन मुझको योगासन....फिर...
एक दिन अल सुबह में आकर,
घर से बाहर मुझे बुलाकर....
पक्का किया मुझे...
यह पाठ पढ़ाकर....कि...
योगासन से ही रह सकोगे....!
तुम स्वस्थ इस धरा पर........
अब...रोज सवेरे जाग-जागकर....
निद्रा को अपनी तड़पाकर...
दिया तन को अतिशय कष्ट....!
बदले में पाया आनन्द अनंत...
और इसी बहाने....मैं....
आया प्रकृति के सन्निकट....
फिर....एक दिन गुरुवर ने....
आकर यह बतलाया....कि....
हर योगासन का बस एक निचोड़,
सूर्य नमस्कार का नहीं है कोई जोड़
मोह न इसका मैं पाया छोड़....
बारह आसन.....बारह बार....
कहते जिसको सूर्य नमस्कार...
गुरुवर की यह प्रबल प्रतिज्ञा....
कर ली मन से मैंने स्वीकार....
अब मैं यह सूर्य नमस्कार.....!
रोज सवेरे करता था....
कभी हाथ जोड़कर हुआ खड़ा,
कभी झुकाया नीचे अपना धड़ा....
कभी टाँग मैं पीछे करता,
फिर आगे लेकर आता था....
धरती माँ से कभी चिपकता....
कभी भुजंग सा बन जाता था....
पर गुरुवर की आज्ञा के पालन में,
मुझे अति आनन्द भी आता था....
सहसा एक दिन पार्क में.....!
देखी बारह मूरत मैंने डार्क में.....
देख के इनको मति मेरी भरमाई....
इन बारह आसन मूरत में मित्रों....!
एक बहुत बड़ी समस्या मैंने पाई....
दिखते तन सबके चिकने-चिकने,
पर रोम देह पर कहीं दिखे ही नाही,
और कहूँ क्या मैं भाई....?
इन बारह के बारह जन कै....
मूड़-कपार दिखै सफाचट ही पाई
इतने भर की बात नहीं प्यारे...
धोती पहिने सब के सब....!
कुपोषित सा ही दिखे मेंरे भाई....
फिर मैंने अपने मन की बुद्धि दौड़ाई
मन-मस्तिष्क दोनों की यात्रा कर,
बुद्धि ने यह बात बताई....कि...
योगासन से गर यही उपलब्धि.....!
मिलनी है मेरे भाई....कि....
गाँव-देश सब यही कहे है....
कि...पण्डित तुम तो गयो दुबराई...
फिर तो इससे अच्छी ही है मित्रों...!
मेरी घर की अपनी पण्डिताई....
घूम-घूम के कथा कहाई....
जहाँ खाय-पियै के मिली मलाई....
देखै-ताकै में तन बलिष्ट देखाई...
तन कै भी सुख बढ़ि जाई...अउर...
खूब मजे में लेब जम्हाई....
अब सच एक तुमसे कहूँ रे प्यारे....
आज से ही...हम छाड़ब योगासन...
बिहने भोरे मा ही गुरुवर से....
माफ़ी माँगै हम जाईब...
योगासन तो दूर.....!
योग करै वालन से भी....अब....
आँख कबहुँ न मिलाइब....
(कृपया हास्य रचना का आनन्द लें)
रचनाकार....
जितेन्द्र कुमार दुबे
अपर पुलिस उपायुक्त, लखनऊ
Comments
Post a Comment