भगवान् परशुराम का जीवन मूल्यों की रक्षा और व्याकुल मानवता की संरक्षा का एक पूर्ण अनुशासित जीवन रहा
भगवान् परशुराम का जीवन मूल्यों की रक्षा और व्याकुल मानवता की संरक्षा का एक पूर्ण अनुशासित जीवन रहा
#भगवान परशुराम जयंती
जौनपुर। 19 अप्रैल 2026,रविवार को रासमंडल में रामेश्वर त्रिपाठी के आवास पर, उन्हीं के संयोजन में भगवान परशुराम की जयंती मनाई गई।प्रभु परशुराम के चित्र का विधिवत पूजन, माल्यार्पण सभाजीत द्विवेदी प्रखर के पौरोहित्य में संपन्न हुआ, तत्पश्चात् वक्ताओं ने अपने उदगार व्यक्त किए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पं. रामकृष्ण त्रिपाठी संप्रति:प्रबंधक जगतनारायण इण्टर कालेज जगतगंज, जौनपुर ने की। मुख्य अतिथि प्रो. आर. एन. त्रिपाठी बीएचयू तथा विशेष अतिथि प्रो. मनोज मिश्र की मंचीय उपस्थिति में वक्ताओं ने भगवान् परशुराम के जीवन और कृतित्व पर अलग अलग दृष्टियों से प्रकाश डाला तथा प्रखर और प्रो आर एन त्रिपाठी ने शास्त्रीय एवम् भौगोलिक, पौराणिक और ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में यह स्थापना की कि,
1. भगवान् परशुराम का जीवन
मूल्यों की रक्षा और व्याकुल मानवता की संरक्षा का एक पूर्ण अनुशासित जीवन रहा। उनका अवतरण सतयुग और त्रेता के संधिकाल में हुआ। उन्होंने तात्कालिक सामाजिक, राजनैतिक और सामरिक परिस्थितियों में सकारात्मक हस्तक्षेप किया तथा क्रूर और निर्मम प्रवृत्तियों और उनके संरक्षकों को दंडित तथा निर्मूल करके व्याकुल मानवता को त्राण दिलाया।
2. विद्वान् वक्ताओं ने इस बात को विशेष रूप से रेखांकित किया कि क्षत्रिय वर्ण तात्कालिक शासकों के लिए प्रयुक्त हुआ है जो एक लचीली, खुली व्यवस्था थी, इसका कोई जातिवादी विमर्श गलत है। उन्होंने अराजकता के अंत का प्रण निभाया जिससे उस समय की मानवता त्रास पा रही थी। वह समाज में अनुशासित एवम् मूल्य पोषक व्यवस्था के आग्रही, पोषक एवम् संरक्षक थे।
3. उनके कृत कार्य सामान्य मानव की सामर्थ्य से परे थे। यह कोई ईश्वरीय अंश या भगवत चेतना से ही संभव था।
4.रामावतार के प्रति आश्वस्त हो जाने पर आगे का दायित्व और वैष्णव धनुष राम को सौंप कर वह महेंद्र पर्वत पर तपस्या को चले गए।
5. भगवान श्री परशुराम अमर हैं, और कल्कि देव को वहीं शस्त्र शिक्षा और दीक्षा देंगे।
वक्ताओं ने उनके जीवन के विविध प्रसंगों का भी स्मरण किया।
आयोजन में कोशिश परिवार के, प्रखर जी, अशोक मिश्र, एस बी उपाध्याय, राजेश पाण्डेय, संजय सिंह सागर, फूलचंद भारती ने भागीदारी की। अशोक मिश्र ने कार्यक्रम का संचालन किया।
कार्यक्रम में कई गणमान्य महानुभावों ने सक्रिय भागीदारी की।
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