गीत -भालचन्द त्रिपाठी

गीत -भालचन्द त्रिपाठी 

धरती लिहले त रहला आसमान लेबा का।
तूं अकेलहीं ई सगरो जहान लेबा का।।

खाली पोति पिसान हाथ में भंडारी हो गइला।
कांकर पाथर सबके दिहला हीरा मोती धइला।
ए भुजइनी के तीसर,अब परान लेबा का।।  
 तूं अकेलहीं .......
घाम लगे जब नीक त पहिले ही तोहरा के चाही।
तनिको छांह रही, तूं लेबा,सबके रही मनाही।
अब ई बादर लेबा, सूरुज लेबा, चान लेबा का।। 
 तूं अकेलहीं .......
केहु के हिस्सा होखे बाकिर अपना नावें कइला।
सपना तक ले लिहला बाकिर तवना पे न अघइला।
आवा लऽ नऽ,इहवां का बा,ई मसान लेबा का।। 
तूं अकेलहीं .......

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