देश के चर्चित आरटीआई एक्टिविस्ट अनिल गलगली के मुंबई मनपा स्कूलों के सबसे प्रख्यात अधीक्षक रामचंद्र पांडे के बारे में एक संस्मरण...
देश के चर्चित आरटीआई एक्टिविस्ट अनिल गलगली के मुंबई मनपा स्कूलों के सबसे प्रख्यात अधीक्षक रामचंद्र पांडे के बारे में एक संस्मरण...
रामचंद्र पांडे जी मुंबई महानगरपालिका (मनपा) के शिक्षा विभाग में वरिष्ठ अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं और अब सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त हो चुके हैं। अपने लंबे और समर्पित कार्यकाल के दौरान उन्होंने जिस ईमानदारी, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के साथ काम किया, वह आज भी उन्हें अन्य अधिकारियों से अलग पहचान दिलाता है।
मेरी उनसे पहली मुलाकात उस समय हुई थी, जब वे कुर्ला के एल वार्ड में शिक्षा विभाग के प्रशासकीय अधिकारी के पद पर कार्यरत थे। पहली ही भेंट में उनकी कार्यशैली, स्पष्ट सोच और निर्णय लेने की क्षमता का गहरा प्रभाव पड़ा। वे उन अधिकारियों में से थे जो बातों से नहीं, बल्कि काम से अपनी पहचान बनाते हैं।
उनकी सबसे बड़ी विशेषता थी कि सीधी और स्पष्ट बात करना। वे किसी भी विषय को अनावश्यक जटिल बनाने के बजाय सीधे मुद्दे पर आते थे और त्वरित निर्णय लेते थे। उनके भीतर ईमानदारी केवल एक गुण नहीं, बल्कि एक दृढ़ सिद्धांत था, जिसे उन्होंने अपने पूरे कार्यकाल में निभाया।
काजूपाड़ा स्थित हिंदी स्कूल का एक महत्वपूर्ण मसला सामने आया था, जो काफी समय से लंबित था और जिससे शिक्षक तथा विद्यार्थी दोनों परेशान थे। जब इस विषय पर उनसे चर्चा की गई, तो उन्होंने बिना किसी देरी के मामले को समझा और तत्काल प्रभाव से उसका समाधान किया। यह केवल प्रशासनिक दक्षता नहीं, बल्कि शिक्षा के प्रति उनकी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का प्रमाण था।
समय के साथ हमारे संबंध औपचारिकता से आगे बढ़कर आत्मीयता में बदल गए। उनसे बातचीत केवल काम तक सीमित नहीं रही, बल्कि शिक्षा व्यवस्था, शिक्षकों की चुनौतियों और सुधार के उपायों पर भी सार्थक चर्चा होती रही।
शिक्षा विभाग में उनके जैसे अधिकारी मिलना वास्तव में दुर्लभ है। वे कामचोर और गैर-जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों से बेहद चिढ़ रखते थे और ऐसे लोगों को लेकर उनका रवैया हमेशा सख्त रहता था। उनका मानना था कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में लापरवाही की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
उनके नेतृत्व में काम करने वाले शिक्षकों में एक विश्वास और सुरक्षा की भावना थी, क्योंकि उन्हें पता था कि यदि वे सही हैं, तो पांडे जी उनके साथ खड़े रहेंगे। यही कारण है कि वे शिक्षकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय रहे।
सेवानिवृत्ति के बाद भी उनका शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ाव समाप्त नहीं हुआ है। आज भी समय-समय पर शिक्षकों की समस्याओं को लेकर उनसे चर्चा होती है और वे अपने अनुभव के आधार पर मार्गदर्शन देते हैं। उनसे मुलाकातें आज भी उतनी ही सार्थक और प्रेरणादायक होती हैं, जितनी उनके सेवा काल में हुआ करती थीं।
रामचंद्र पांडे जी जैसे अधिकारी न केवल एक कुशल प्रशासक होते हैं, बल्कि वे एक आदर्श, एक मार्गदर्शक और एक प्रेरणा स्रोत भी होते हैं। उनका व्यक्तित्व यह सिखाता है कि यदि नीयत साफ हो और काम के प्रति समर्पण हो, तो प्रशासनिक व्यवस्था में भी सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
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