प्रागैतिहासिक औज़ार निर्माण तकनीकों पर गहन प्रशिक्षण

प्रागैतिहासिक औज़ार निर्माण तकनीकों पर गहन प्रशिक्षण
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग द्वारा शताब्दी समारोह (2025–2026) के अंतर्गत आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला “स्टोरीज़ इन स्टोन: ए वर्कशॉप ऑन प्रीहिस्टोरिक लिथिक्स” का सफलतापूर्वक आयोजन किया जा रहा है।
कार्यशाला के द्वितीय दिवस पर प्रतिभागियों को प्रागैतिहासिक पाषाण उपकरणों की उन्नत अवधारणाओं से परिचित कराया गया। दिन की शुरुआत बाइफेशियल टेक्नोलॉजी के परिचयात्मक सत्र से हुई, जिसमें हस्तकुठार एवं क्लीवर निर्माण की विभिन्न तकनीकों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। क्लीवर की सूक्ष्मताओं को कार्यशाला के संयोजक डॉ. जोश राफेल ने अपने विशेष व्याख्यान में सरल एवं स्पष्ट रूप से समझाया।
इसके पश्चात हैंडऐक्स फैकोनाज (Handaxe Façonnage) पर एक व्यावहारिक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने द्विपार्श्वीय औज़ारों ( bifacial) के निर्माण की तकनीकों का प्रत्यक्ष अभ्यास किया। तत्पश्चात लेवल्वा (Levallois) एवं लैमिनर तकनीकी रणनीतियों पर व्याख्यान दिया गया, जिसमें उन्नत कोर रिडक्शन तकनीकों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
दिन का समापन विश्लेषण एवं चर्चा सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और विषय से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया।

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