संस्कृत भाषा में संवेदना का प्राण समाहित - कृष्ण बिहारी

संस्कृत भाषा में संवेदना का प्राण समाहित - कृष्ण बिहारी 
प्रयागराज। 11 अप्रैल 2026, शनिवार को निखिल भारतीय संस्कृत परिषद् एवं पुरातन छात्र परिषद् , संस्कृत विभाग इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्त्वावधान में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हिन्दुस्तानी एकेडेमी के सभागार में किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता उ.प्र.लोकसेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. कृष्ण बिहारी पाण्डेय ने की। 
डॉ. अभिषेक त्रिपाठी मंडलीक के स्वागत उद्बोधन के बाद प्रो.अनिल प्रताप गिरि ने कहा कि जीवन अनित्य होते हुए भी हमारी ज्ञान की परम्परा नित्य है। मुख्य अतिथि प्रो. हरिदत्त शर्मा ने कहा कि प्रयागस्थ संस्कृत विद्वानों ने सांस्कृतिक चेतना को जागृत करते हुए वैश्विक प्रभाव को आलोकित किया। प्रो. कृष्ण बिहारी पाण्डेय ने कहा कि संस्कृत भाषा में संवेदना का प्राण बसता है। प्रो.मंजुला जायसवाल, डॉ. जनार्दन प्रसाद पाण्डेय मणि, प्रो. राजेन्द्र त्रिपाठी, वेदान्ती ने संस्कृत परम्परा से सम्बंधित अनेक संस्मरण सुनाये। डॉ. सूर्यकान्त त्रिपाठी ने संचालन किया।
  द्वितीय सत्र में प्रो. हरिदत्त शर्मा की अध्यक्षता में काव्य रसवर्षा हुई। काव्यपाठ में देवी प्रसाद मिश्र वेदान्ती, प्रो. जनार्दन प्रसाद पाण्डेय मणि, प्रो. राजेन्द्र त्रिपाठी रसराज, डॉ. शम्भुनाथ त्रिपाठी अंशुल, डॉ. इन्दु जमदग्निपुरी, डॉ. पीयूष मिश्र, नीलम तिवारी, डॉ. सूर्यकान्त त्रिपाठी, डॉ. संतोष मिश्रा, डॉ.योगीराज ने अपने रसपूर्ण काव्यपाठ से श्रोताओं को आह्लादित किया। इस अवसर पर  प्राध्यापकगण में डॉ.अमिता सिंह, डॉ. दीप्ति विष्णु, डॉ.पूजा जायसवाल, डॉ. आरती सरोज, डॉ. दीपेश शुक्ल, डाॅ.सुनील शुक्ल,डॉ. गीतांजलि पाण्डेय, डॉ. प्रियंक, डॉ. अखिल, डॉ.आकांक्षा, डॉ.शारदा, डॉ.निशा खन्ना, डॉ.अनिल, डॉ. शत्रुघ्न मिश्र, डॉ. संजय, डॉ. नन्द किशोर, डॉ. सुनील, डॉ. अनिल शुक्ल, डॉ.प्रवीण द्विवेदी, डॉ. सोनमती, अश्वनी तिवारी,रिंकी मिश्रा, परिमल इत्यादि सैकड़ों पुराछात्र उपस्थित रहे।

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