कौन देगा मोल?

कौन देगा मोल?
उन आंसुओं का,
जो किसी की याद में 
अकेले में निकल आते हैं ।
नजर बचा के पोंछ लिये जाते हैं, 
 या कोये किनारे सूख जाते हैं ,
गुमनाम होकर रह जाते हैं ।
 अनन्त  आंसू ,
 अनगिनत आंखें , सहस्त्रों वर्ष पुराने जड़ हो चुके ,
या सृष्टि के साथ निकलते गुमनाम रहे आंसू।
आंसुओं से भरा विस्तृत दुःखमय बुद्ध संसार  
भूत और  वर्तमान में निकल शुष्क हो गये 
किसी की याद में, आह में 
या किसी की चाह में ।
जिससे पुनर्मिलन नामुमकिन है ।
ये अपनों के कारण आंसू 
या अपनों के लिए आंसू 
कोई दूर से जरूर देखा होगा 
तलाशो कहां है वह?  है कौन?
मौन में परत दर परत 
सदियों के दबे आंसू, 
वह कौन कब, तोड़ेगा मौन?

     मुरलीधर मिश्र 
देवरिया/ बनारस

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