महिला आरक्षण कानून को लेकर सतीश मनचंदा ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना
महिला आरक्षण कानून को लेकर सतीश मनचंदा ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना
मुंबई। महिला आरक्षण कानून में संशोधन का विधेयक लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रहा. 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए के सत्ता में आने के बाद से पहली बार कोई विधेयक पास नहीं हो सका है। कांग्रेस सेवादल के मुंबई अध्यक्ष सतीश मनचंदा ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बिल को लेकर सरकार की मंशा ही खराब थी। बिल को परिसीमन (Delimitation) से जोड़ा गया है। उनका तर्क है कि 2011 की जनगणना को आधार बनाकर परिसीमन करना गलत है और इसे 2026 की जनगणना के बाद ही किया जाना चाहिए। बिल में ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) महिलाओं के लिए 33% आरक्षण के भीतर कोटा सुनिश्चित नहीं था,जो सामाजिक न्याय के खिलाफ है। श्री मनचंदा ने कहा कि महिलाओं को आरक्षण देने के बजाय 'हिस्सा चोरी' और सिर्फ भारत के निर्वाचन क्षेत्र का नक्शा बदलने का एक पैंतरा था। आगे मनचंदा ने कहा कि जिस तरह से एक देश का प्रधानमंत्री इतने बड़े पद पर विराजमान हो और वह देश की संसद में बोलता हो मैं इस जाति से हूं इससे शर्म की बात और कोई हो नहीं सकता यूजीसी जैसे कानून को लाकर इस देश के भाईचारे को जिस तरह से नफरत में तलवार की धार दी इस प्राइम मिनिस्टर ने इससे यह साबित होता है कि यह प्रधानमंत्री किस विचार का है जो हिंदुओं को हिंदुओं से लड़वाता हो शिक्षा के मंदिर में जातिवाद का नफरत फैलता हो ऐसे प्रधानमंत्री को प्रधानमंत्री की कुर्सी शोभा नहीं देती नरेंद्र मोदी को तुरंत इस पद से त्यागपत्र दे देना चाहिए उन्होंने कहा कि भाजपा शासित राज्यों में महिलाओं के प्रति जिस तरह अपराध बढ़ रहे हैं, वह गंभीर चिंता का विषय है। अच्छा होगा कि पहले भाजपा अपने शासित राज्यों में महिलाओं पर लगातार बढ़ रहे अत्याचार को रोकने की दिशा में सार्थक कदम उठाए । उन्होंने कहा कि यह बिल देश में पांच राज्यों में हो रहे चुनाव को देखते हुए सोची समझी वोट बैंक की राजनीति के लिए आनन फानन में लाया गया था। ऐसे में बिल को फेल होना ही था। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार लगातार देश में नफरत के बीज बोने का काम कर रही है। हिंदू मुसलमान के राजनीतिक करने के बाद, यूजीसी जैसा कानून लाकर हिंदुओं को ही आपस में लड़ाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि महिलाओं पर अत्याचार के मामले में भाजपा शासित राज्य सबसे आगे हैं।
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