अनिल गलगलीः संघर्ष, पत्रकारिता और जनहित की आवाज़ का सफर
अनिल गलगलीः संघर्ष, पत्रकारिता और जनहित की आवाज़ का सफर
14 सितंबर 1975 को जन्मे अनिल गलगली के जीवन के 50 वर्ष केवल उम्र का एक पड़ाव नहीं, बल्कि संघर्ष, सामाजिक सरोकार, पत्रकारिता, जनजागरण और व्यवस्था से सवाल पूछने की निरंतर यात्रा हैं। पांच दशकों के इस सफर में उन्होंने अपने लिए केवल एक पहचान बनाने का प्रयास नहीं किया, बल्कि आम नागरिकों की समस्याओं को अपनी आवाज बनाने का रास्ता चुना। मुंबई की सामाजिक और प्रशासनिक परिस्थितियों को करीब से देखते हुए अनिल गलगली के मन में शुरू से ही यह सवाल रहा कि आम आदमी अपनी समस्याओं के लिए आखिर किसके पास जाए और जब व्यवस्था जवाब न दे तो उससे सवाल कौन पूछे। यही सवाल आगे चलकर उनके सार्वजनिक जीवन की दिशा बना।
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