एक विद्यार्थी, एक वृक्ष, एक संरक्षक अभियान के तहत विवेकानंद मॉडर्न एकेडमी में हुआ वृक्षारोपण
एक विद्यार्थी, एक वृक्ष, एक संरक्षक अभियान के तहत विवेकानंद मॉडर्न एकेडमी में हुआ वृक्षारोपण
लखनऊ। दिनांक : 13 अगस्त 2026
गोमती दर्शन द्वारा संचालित “एक विद्यार्थी, एक वृक्ष, एक संरक्षक” अभियान के अंतर्गत आज विवेकानंद मॉडर्न एकेडमी, कठवारा, बख्शी का तालाब में वृक्षारोपण एवं जल-संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के विद्यार्थियों को वृक्षों, तालाबों, पोखरों, वेटलैंड्स एवं नदियों के संरक्षण के महत्व के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के प्रति जागरूक किया गया।
कार्यक्रम में गोमती दर्शन के संयोजक अधिवक्ता अनुराग पाण्डेय एवं अध्यक्ष श्वेता सिंह ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि “वृक्ष वर्षा को केवल आकर्षित नहीं करते, बल्कि वर्षा चक्र को बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।” वृक्षों की पत्तियों से होने वाले वाष्पोत्सर्जन के माध्यम से वातावरण में नमी बढ़ती है, जो बादलों के निर्माण और वर्षा चक्र को प्रभावित करती है। वर्षा से तालाब, पोखर, झील और वेटलैंड्स पुनर्भरित होते हैं तथा इन जलस्रोतों से पानी धरती के भीतर रिसकर भूजल का भंडारण करता है। यही भूजल अनेक प्राकृतिक स्रोतों के माध्यम से पुनः नदियों को जीवन देता है।
उन्होंने कहा कि वृक्ष, वर्षा, वेटलैंड्स, भूजल और नदियां एक-दूसरे से जुड़े हुए प्राकृतिक तंत्र का हिस्सा हैं। इसलिए जो व्यक्ति एक वृक्ष लगाता है, किसी तालाब या पोखर को बचाता है अथवा किसी वेटलैंड की रक्षा करता है, वह वास्तव में पूरे समाज के भविष्य और जल-सुरक्षा के लिए कार्य करता है। वर्षा कृषि, नदियों, पेयजल, पर्यावरण और सामाजिक जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है तथा वर्षा में निरंतर कमी हमारे लिए गंभीर चेतावनी है। जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए अधिक से अधिक वृक्ष लगाने और प्राकृतिक जलस्रोतों को संरक्षित करने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में माँ गोमती के महत्व, उनकी भूमिका, उद्गम एवं संगम तथा गोमती नदी से जुड़ी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत पर भी विस्तार से चर्चा की गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि गोमती के तटों पर आज भी हजारों वर्षों से चली आ रही सांस्कृतिक परंपराएं और हमारी सभ्यता की स्मृतियां जीवित हैं। इस सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए माँ गोमती और उनके जलस्रोतों का संरक्षण आवश्यक है।
इस अवसर पर 28 मार्च से 5 अप्रैल 2026 तक संपन्न गोमती दर्शन यात्रा का भी उल्लेख किया गया। यह पदयात्रा पीलीभीत के माधोटांडा स्थित फुलहर झील/गोमती उद्गम स्थल से प्रारंभ होकर शाहजहाँपुर, लखीमपुर, सीतापुर होते हुए लखनऊ तक पहुंची थी। यात्रा का नेतृत्व गोमती दर्शन के संयोजक अधिवक्ता अनुराग पाण्डेय एवं अध्यक्ष श्वेता सिंह ने किया। विद्यार्थियों को बताया गया कि इस यात्रा के दौरान गोमती के तटवर्ती क्षेत्रों में नदी से जुड़ी प्राचीन संस्कृति, लोक परंपराओं और जलस्रोतों को निकट से समझने का अवसर मिला तथा इनके संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाया गया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय प्रबंधक श्री आलोक कृष्ण द्वारा अधिवक्ता अनुराग पाण्डेय एवं श्वेता सिंह का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। विद्यालय परिसर में विद्यार्थियों के साथ वृक्षारोपण भी किया गया।
“एक विद्यार्थी, एक वृक्ष, एक संरक्षक” अभियान के अंतर्गत प्रारंभिक चरण में पांच विद्यार्थियों को वृक्ष प्रदान कर उन्हें अपने-अपने वृक्ष का संरक्षक बनने के लिए प्रेरित किया गया। विद्यार्थियों को बताया गया कि आने वाले समय में विद्यालय के अन्य विद्यार्थियों को भी वृक्ष उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए विद्यार्थियों को अपने अभिभावकों की सहमति से एक सहमति-पत्र देना होगा, जिसमें वे यह संकल्प लेंगे कि उन्हें दिया गया वृक्ष केवल लगाया ही नहीं जाएगा, बल्कि उसका नियमित संरक्षण एवं देखभाल भी की जाएगी।
विद्यालय के प्रबंधक श्री आलोक कृष्ण एवं प्रधानाचार्य सुरम्या सिंह ने विद्यार्थियों को जल, नदियों, वृक्षों और पर्यावरण के महत्व को समझाते हुए प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि बच्चों में प्रकृति और जल के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
कार्यक्रम में तालाबों, पोखरों एवं वेटलैंड्स के संरक्षण तथा महत्वपूर्ण प्राकृतिक जलस्रोतों एवं वेटलैंड्स को राष्ट्रीय महत्व के संरक्षित स्मारक/धरोहर के रूप में संरक्षण दिए जाने की आवश्यकता पर भी विचार व्यक्त किए गए।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि “एक वृक्ष केवल एक पौधा नहीं, बल्कि वर्षा, जल, भूजल, नदी और आने वाली पीढ़ियों के जीवन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण कड़ी है।”
(श्वेता सिंह)
अध्यक्ष, गोमती दर्शन
मो.: 99561 53180
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