*रिश्ते सिर्फ खून से नहीं, संवेदनाओं से बनते हैं। बीमार पिता से मिलने अस्पताल पहुंचे सुरेश कुमार शर्मा**नाई समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश चंद्र शर्मा के पिता का हाल जानने पहुंचे लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के राष्ट्रीय सचिव; बोले “समाज के सुख-दुःख में साथ खड़ा रहना ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी*
*रिश्ते सिर्फ खून से नहीं, संवेदनाओं से बनते हैं। बीमार पिता से मिलने अस्पताल पहुंचे सुरेश कुमार शर्मा*
*नाई समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश चंद्र शर्मा के पिता का हाल जानने पहुंचे लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के राष्ट्रीय सचिव; बोले “समाज के सुख-दुःख में साथ खड़ा रहना ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी*
रिपोर्टर, सुरेश कुमार शर्मा
जौनपुर। समाजसेवा केवल मंचों और भाषणों तक सीमित नहीं होती, बल्कि जरूरत के समय किसी के साथ खड़े होकर उसका हौसला बढ़ाने का नाम भी समाजसेवा है। इसी मानवीय भावना की मिसाल उस समय देखने को मिली, जब लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के खेल एवं सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय सचिव सुरेश कुमार शर्मा भारतीय नाई समाज कल्याण विकास सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश चंद्र शर्मा के अस्वस्थ पिता का हाल जानने जौनपुर के वाजिदपुर तिराहा स्थित उजाला हॉस्पिटल पहुंचे।
पिता के अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी मिलते ही सुरेश कुमार शर्मा तत्काल अस्पताल पहुंचे और परिजनों से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। उन्होंने बीमार पिता से मिलकर उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की और परिवार को हरसंभव सहयोग एवं साथ का भरोसा दिलाया।
इस दौरान सुरेश कुमार शर्मा ने कहा कि “रिश्ते सिर्फ खून से नहीं बनते, रिश्ते संवेदनाओं, विश्वास और जरूरत के समय साथ निभाने से बनते हैं।
उन्होंने कहा कि किसी अपने के चेहरे पर मुस्कान देखना और कठिन समय में उसके परिवार के साथ खड़ा होना उनके लिए किसी पद या सम्मान से कम नहीं है। अस्पताल में बीमार पिता से मुलाकात के दौरान कुछ आत्मीय बातचीत और हंसी-मजाक के क्षणों ने माहौल को भावुक कर दिया। उनके चेहरे पर मुस्कान देखकर सुरेश कुमार शर्मा ने इसे अपने लिए ईश्वर का आशीर्वाद बताया।
*पद नहीं, समाज का विश्वास मेरी असली ताकत*
सुरेश कुमार शर्मा ने कहा कि उनके लिए समाजसेवा कोई दिखावे या औपचारिकता का विषय नहीं, बल्कि जीवन का उद्देश्य है। समाज के किसी व्यक्ति के सुख-दुःख में उसके साथ खड़ा होना ही उनकी प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा, “मुझे किसी पद, प्रतिष्ठा या प्रसिद्धि की लालसा नहीं है। समाज के लोगों का विश्वास, स्नेह और आशीर्वाद ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है। जब तक जीवन है। मानवता, समाज सेवा और अपने लोगों के सम्मान के लिए समर्पित रहूंगा।
उन्होंने नाई समाज सहित समाज के सभी सम्मानित नागरिकों से अपील की कि वे उन्हें अपना स्नेह, आशीर्वाद और मार्गदर्शन देते रहें। उन्होंने कहा कि समाज तभी मजबूत होता है। जब उसके लोग एक-दूसरे के सुख-दुःख में बिना किसी भेदभाव के साथ खड़े हों।
अंत में सुरेश कुमार शर्मा ने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिनेश चंद्र शर्मा के पिता को शीघ्र पूर्ण स्वास्थ्य लाभ मिले और वे स्वस्थ होकर जल्द अपने परिवार के बीच वापस लौटें।
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