भारतीय संस्कृति अनुभूति और सहजीवन का संदेश देती है : राजकिशोर वाजपेई
भारतीय संस्कृति अनुभूति और सहजीवन का संदेश देती है : राजकिशोर वाजपेई
ठाणे। बाबू शोभनाथ सिंह मेमोरियल ट्रस्ट की केंद्रीय इकाई की ओर से शनिवार सायंकाल आयोजित व्याख्यानमाला में प्रख्यात वक्ता राजकिशोर वाजपेई ने "भारतीय संस्कृति" विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति केवल परंपराओं का संग्रह नहीं, बल्कि अनुभूति, सहजीवन और सार्वभौमिक दृष्टि का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल उद्देश्य मनुष्य को श्रेष्ठ जीवन मूल्यों से जोड़कर मनुष्यता की स्थापना करना है। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. ज्योति कृष्ण मिश्रा द्वारा सरस्वती वंदना से हुआ। इसके बाद ट्रस्ट की राष्ट्रीय सचिव सत्यभामा सिंह ने ट्रस्ट का संक्षिप्त परिचय देते हुए मुख्य वक्ता का स्वागत किया और व्याख्यान के लिए आमंत्रित किया।
अपने संबोधन में राजकिशोर वाजपेई ने कहा कि भारतीय संस्कृति की विषय-वस्तु संपूर्ण वसुधा है। हमारे देवविग्रह किसी न किसी जीव, वृक्ष अथवा प्रकृति से जुड़े हैं और उनके वाहन भी विभिन्न प्राणी हैं, जो सहजीवन और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में तर्क और शास्त्रार्थ का महत्वपूर्ण स्थान है, जहां द्वेष और क्रोध के लिए कोई स्थान नहीं है। महाभारत, रामायण और श्रीमद्भगवद्गीता के विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संस्कृति का अंतिम लक्ष्य मनुष्य को मनुष्यता तक पहुंचाना है। जीवन में सत्य, तप, त्याग और नैतिक मूल्यों को अपनाना ही भारतीय संस्कृति की वास्तविक पहचान है। उन्होंने कहा कि गुरु कोई शरीर नहीं, बल्कि ज्ञान का स्वरूप होता है और वही गुरुत्व उसे गुरु बनाता है। भारत में स्थान और भाषा के आधार पर विविधता दिखाई देती है, किंतु उसकी मूल सांस्कृतिक चेतना सदैव एक रही है।
व्याख्यान के बाद संवाद सत्र आयोजित हुआ, जिसमें श्रोताओं ने भारतीय संस्कृति से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका वक्ता ने विस्तार से उत्तर दिया। इस अवसर पर सत्यभामा सिंह ने पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण पर एक भावपूर्ण छंद भी प्रस्तुत किया। वक्ताओं ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी तेजी से अपसंस्कृति की ओर बढ़ रही है। ऐसे समय में अपनी प्राचीन संस्कृति को जानना, समझना और जीवन में अपनाना पहले से अधिक आवश्यक हो गया है। उपभोक्तावाद के बढ़ते प्रभाव के बीच त्याग, सत्य और तप जैसे जीवन मूल्य चुनौती का सामना कर रहे हैं। कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रीय सचिव सत्यभामा सिंह ने मुख्य वक्ता तथा सभी श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
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