विषहर कवि जितेन्द्र कुमार दुबे
विषहर
कवि जितेन्द्र कुमार दुबे
नागपंचमी के अवसर पर....!
"विषधर" को सब दूध पिलाते,
खूब खिलाते लावा.....
इसी बहाने मित्रों....
महादेव को खुश करने का...!
करते अपना-अपना दावा....
एक अचम्भा इधर तो देखो...
नहीं पिलाता दूध मुझे कोई..
ना ही खिलाता मावा...जबकि...
नागपंचमी तिथि का हूँ जनमा..
और....जग में...जन-मानस में...
"विषहर" ....मोरा नाम कहावा...
रचनाकार
कवि जितेन्द्र कुमार दुबे
कैथी, वाराणसी,उ.प्र.
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