कजरी -----आवा लड़ल जाई गांउ मा परधानी पिया बदले जिंदगानी पिया न-

कजरी

आवा लड़ल जाई गांउ मा परधानी पिया 
बदले जिंदगानी पिया न

प्रियतम परदेश में रहते हैं। नायिका गांव में अकेले ही रहती है। वह हमेशा कड़की का रोना रोते रहते हैं। पढ़ी लिखी पत्नी ने प्रियतम को फोन करके समझाया -

आवा लड़ल जाई गांउ मा परधानी पिया 
 *बदले जिंदगानी पिया न।*

छत पे सोलरवा लगउबइ 
बिजुली देश क बचउबइ 
रहल जाई *एसी* में दुनउं परानी पिया 
*बदले जिंदगानी पिया न।*

नकदी फसल के बहार 
पइसा आई बेशुमार 
तार घेरि-घेरि कइ जाई किसानी पिया 
*बदले जिंदगानी पिया न।*

मिले नवा रोजगार 
खतम होई भ्रष्टाचार 
केउ क चले नाहीं गाउं में मनमानी पिया 
*बदले जिंदगानी पिया न।*

जाति-पाति कइ लड़इया 
अब न होइ पाई सइयां 
नव विकास से गढ़ब नई कहानी पिया 
*बदले जिंदगानी पिया न।*

दइ गरीब के आवास 
मिलि करब खड़ंजा पास 
घरे-घरे नल से दिहल जाई पानी पिया 
*बदले जिंदगानी पिया न।*

सुना-सुना हे सुरेश 
लउटि आवा अपने देश
गांउ में भी मिलि सकेला दाना-पानी पिया 
*बदले जिंदगानी पिया न।*

सुरेश मिश्र 
9869141831
sureshmishra306@gmail.com

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