*फलों का राजा आम**--------सुखराम शर्मा सागर*

*फलों का राजा आम*
*--------सुखराम शर्मा सागर* 

वन संपदा हरियाली पर्वत नदियां झरने घाटी घाटी, 
सोने की चिड़ियां मज़हब की नगरी स्वर्णिम माटी,।

चौदह रत्नों का सागर अमृत रस की धार, 
पांच वृक्ष की महिमा आम का नहीं शुमार।

धन्य धरा जहां विराजित भारत में चारों धाम,
फल पाकर  झुक जाए फलों का राजा आम।

खुशियली जब नहीं समाए सभी मनाते उत्सव,
रूप रस सिंगार सजाए मधुर रस आम महोत्सव।

गुरम्मा चटनी अचार अमावट सिरके में डाला जाता,
परंपरा है फल उत्सव स्वागत में आम परोसा जाता। 

तन मन रहे समर्पित जब गुठली शैष रह जाए, 
चूर्ण बन नाशक उदर विकार वृक्ष पुनः बन जाए।

आतप वर्षा वायु सहनकर पर हित में खड़ा रहे, 
वैज्ञानिक विधि से एक वृक्ष में रंग रूप कई धरे।

बिना वृक्ष जीवन दुर्लभ पांच वृक्ष फलदार, 
सागर सी मर्यादा  समझो जीवन मर्म विचार।

जनकवि सुखराम शर्मा सागर सलोन रायबरेली 91 25630310

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