*औचक निरीक्षण में सामने आई मानवता की मिसाल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. गंगाराम गौतम ने खुद संभाला मोर्चा, गंभीर मरीज का किया जीवनरक्षक उपचार*
*औचक निरीक्षण में सामने आई मानवता की मिसाल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. गंगाराम गौतम ने खुद संभाला मोर्चा, गंभीर मरीज का किया जीवनरक्षक उपचार*
सुरेश कुमार शर्मा वाराणसी मंडल ब्यूरो चीफ राष्ट्रीय प्राइम वाइस
जौनपुर। सरकारी अस्पतालों की कार्यशैली को लेकर अक्सर सवाल उठते रहते हैं। लेकिन जौनपुर में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने स्वास्थ्य विभाग की संवेदनशील छवि को नई पहचान दे दी। सतहरिया स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, मुंगरा बादशाहपुर के औचक निरीक्षण पर पहुंचे मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. गंगाराम गौतम ने पद और प्रोटोकॉल से ऊपर उठकर मानवता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।
निरीक्षण के दौरान जब उनकी नजर इमरजेंसी वार्ड में इलाज के इंतजार में गंभीर हालत से जूझ रहे मरीज पर पड़ी, तो उन्होंने किसी का इंतजार नहीं किया। बिना समय गंवाए स्वयं उपचार शुरू किया और मरीज को तत्काल आवश्यक चिकित्सा उपलब्ध कराई। इस संवेदनशील और त्वरित निर्णय ने वहां मौजूद लोगों का दिल जीत लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि मरीज की जान से बढ़कर कोई औपचारिकता नहीं होती। उनका मानना था कि चिकित्सक का पहला धर्म मरीज का जीवन बचाना है। और उन्होंने इसे व्यवहार में भी साबित कर दिखाया।
उपचार के बाद डॉ. गौतम ने अस्पताल के चिकित्सकों और कर्मचारियों को कड़े निर्देश दिए कि इमरजेंसी सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रत्येक मरीज को समय पर और गुणवत्तापूर्ण उपचार मिलना हर हाल में सुनिश्चित किया जाए।
इस घटना के बाद अस्पताल में मौजूद मरीजों, तीमारदारों और स्थानीय लोगों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी के मानवीय और कर्मठ रवैये की खुलकर सराहना की। लोगों का कहना था कि यदि प्रत्येक अधिकारी इसी तरह जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ कार्य करे। तो सरकारी अस्पतालों पर जनता का भरोसा और मजबूत होगा।
यह घटना केवल एक निरीक्षण नहीं, बल्कि यह संदेश है। कि सच्चा नेतृत्व वही है। जो संकट की घड़ी में स्वयं आगे बढ़कर जिम्मेदारी निभाए। मानवता, सेवा और कर्तव्यनिष्ठा का यह उदाहरण स्वास्थ्य विभाग के लिए प्रेरणास्रोत बन सकता है।
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