*बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ अब नहीं चलेगा: जौनपुर में 15 जुलाई तक चलेगा ‘मिशन सेफ फ्यूचर’, नियम तोड़ने वाले स्कूल वाहनों पर होगी सख्त कार्रवाई*
*बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ अब नहीं चलेगा: जौनपुर में 15 जुलाई तक चलेगा ‘मिशन सेफ फ्यूचर’, नियम तोड़ने वाले स्कूल वाहनों पर होगी सख्त कार्रवाई*
रिपोर्टर,सुरेश कुमार शर्मा
जौनपुर, 03 जुलाई। सड़क दुर्घटनाओं में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने हर अभिभावक की चिंता बढ़ा दी है। सबसे अधिक चिंता तब होती है। जब मासूम बच्चों की जिंदगी को जोखिम में डालकर स्कूल वाहन बिना फिटनेस, बिना परमिट और सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए सड़कों पर दौड़ते नजर आते हैं। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए परिवहन विभाग ने जनपद में 1 जुलाई से 15 जुलाई तक ‘मिशन सेफ फ्यूचर’ विशेष अभियान शुरू किया है।
इस अभियान का उद्देश्य केवल चालान काटना नहीं, बल्कि हर बच्चे को सुरक्षित घर से स्कूल और स्कूल से घर तक पहुंचाना है। अभियान के तहत जनपद में संचालित सभी स्कूल वाहनों की सघन जांच की जाएगी। जिन वाहनों में फिटनेस, परमिट, बीमा, अग्निशामक यंत्र, फर्स्ट एड बॉक्स, स्पीड गवर्नर अथवा अन्य आवश्यक सुरक्षा मानकों की कमी मिलेगी, उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
संभागीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) अजीत सिंह ने सभी विद्यालय प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों से अपील की है। कि वे 7 जुलाई तक अपने विद्यालयों में संचालित सभी वाहनों के फिटनेस प्रमाणपत्र, परमिट, बीमा एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज नियमानुसार अद्यतन करा लें। उन्होंने अभिभावकों से भी आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को केवल उन्हीं वाहनों से भेजें जो सभी सुरक्षा मानकों का पालन करते हों।
आरटीओ ने स्पष्ट किया कि 7 जुलाई के बाद परिवहन विभाग, पुलिस और यातायात पुलिस की संयुक्त टीम विशेष जांच अभियान चलाएगी। जांच में नियमों का उल्लंघन करते पाए जाने वाले वाहनों पर चालान, सीज सहित अन्य विधिक कार्रवाई की जाएगी। यदि कोई विद्यालय बार-बार चेतावनी के बावजूद नियमों की अनदेखी करता पाया गया, तो उसकी रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को भेजी जाएगी तथा आवश्यकता पड़ने पर विद्यालय की मान्यता निरस्त कराने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
आज आवश्यकता केवल प्रशासनिक कार्रवाई की नहीं, बल्कि हर वाहन चालक, स्कूल प्रबंधन और अभिभावक की नैतिक जिम्मेदारी निभाने की भी है। एक छोटी-सी लापरवाही किसी मासूम की पूरी जिंदगी छीन सकती है। कुछ मिनट की जल्दबाजी किसी परिवार की खुशियां हमेशा के लिए उजाड़ सकती है।
याद रखिए
तेज रफ्तार बहादुरी नहीं, लापरवाही है।
ट्रैफिक नियम जुर्माना बचाने के लिए नहीं, जिंदगी बचाने के लिए बनाए गए हैं।
आइए, हम सब मिलकर संकल्प लें कि न ओवरलोडिंग करेंगे, न तेज रफ्तार चलेंगे, न बिना फिटनेस और परमिट के वाहन सड़क पर उतारेंगे। क्योंकि हर बच्चे की सुरक्षित मुस्कान ही हमारा सबसे बड़ा दायित्व है।
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