पं.जमदग्निपुरी की पुस्तक *अब तो जीवन सौंप दिया* का हुआ लोकार्पण

पं.जमदग्निपुरी की पुस्तक *अब तो जीवन सौंप दिया* का हुआ लोकार्पण 
     पं.जमदग्निपुरी द्वारा रचित महाकाव्य *अब तो जीवन सौंप दिया* का विमोचन श्रीराम जानकी जी के सानिध्य में आ.डाॅ कृपाशंकर मिश्र,काव्य मर्मज्ञ संजय द्विवेदी,महान शिक्षाविद हौंसिला प्रसाद अन्वेषी जी के करकमलों द्वारा हुआ। श्रीराम जानकी मंदिर लालबहादुर शास्त्री नगर साकीनाका मुम्बई में आयोजित उपरोक्त आयोजन की अध्यक्षता आ.महान शिक्षा विद हौंसिला प्रसाद अन्वेषी जी की। मुख्य अतिथि डॉ कृपाशंकर मिश्र संजय द्विवेदी नीलम पब्लिकेशन के प्रधान दिनेश वर्मा जी रहे।
     राष्ट्रीय साहित्यिक सामाजिक व सांस्कृतिक संस्था काव्यसृजन न्यास मुम्बई द्वारा आयोजित मासिक आयोजन में पुस्तक विमोचन के साथ साथ भव्य काव्यगोष्ठी व विचार प्रवाह भी हुआ। विचार प्रवाह में अपने प्रखर विचार आ.ओमप्रकाश मिश्र व डॉ कृष्ण कुमार मिश्र जी ने रखे।नीलम पब्लिकेशन के प्रधान दिनेश वर्मा जी ने पं.जमदग्निपुरी का सम्मान मोमिंटो प्रशस्ति पत्र व मेडल प्रदान कर किया।सभी मेहमानों का सम्मान मन:पूर्वक काव्यसृजन परिवार ने किया। आयोजन को भव्यता प्रदान किया अपने दमदार संचालन से प्रा.अंजनीकुमार द्विवेदी जी ने।
     इस आयोजन को अपनी सशक्त रचनाओं से ऊंचाई प्रदान किया आ.अवनीश दीक्षित"दिव्य",आनंद पाण्डेय "केवल", लालबहादुर यादव "कमल", शिवनारायण यादव,"आत्मिक"श्रीधर मिश्र, ओमप्रकाश तिवारी, प्रथमेश नाईक,गीतकार रामजी कनौजिया,संजय द्विवेदी, डॉ कृपाशंकर मिश्र, हौंसिला प्रसाद "अन्वेषी", पंडित जमदग्निपुरी,विनय अथवाल,अरुण दूबे "अविकल", दिनेश वर्मा, डॉ कृष्ण कुमार मिश्र,आदि रहे।सभी विद्वतजनों ने पं.जमदग्निपुरी द्वारा रचित महाकाव्य *अब तो जीवन सौंप दिया* के प्रकाशित व लोकार्पित होने की बधाई व शुभकामनाएं दीं। आभार उपाध्यक्ष ओमप्रकाश तिवारी जी ने प्रकट किया। अतिथि द्वय डॉ कृपाशंकर मिश्र व संजय द्विवेदी जी ने पुस्तक पर संक्षिप्त प्रकाश डाला।जहाॅं डॉ कृपाशंकर मिश्र जी ने पं.जमदग्निपुरी जी के संघर्षों का उल्लेख किया। वहीं संजय द्विवेदी जी ने पुस्तक को नवधाभक्ति से जोड़ते हुए पुस्तक पर प्रकाश डाला।सनद रहे यह महाकाव्य सीकर नरेश श्री खाटू श्याम जी को समर्पित है। इसमें खाटूश्यामजी के जीवन से जुड़ी घटनाओं को पं.जमदग्निपुरी जी ने अपने गीत के द्वारा बड़े ही सलीके से उकेरा है। खाटूश्यामजी का गुणगान गाते गाते भक्ति  में लीन हो जीवन ही  सौंप दिया।इस पुस्तक में लेखक की भक्ति की पराकाष्ठा दिखती है।ऐसा संजय द्विवेदी जी ने कहा।अध्यक्षीय उद्बोधन में आ.अन्वेषी जी ने सभी रचनाकारों की बारीकी से समीक्षा की और नव रचनाकारों का उत्साह वर्धन भी किया। राष्ट्रगान के उपरांत आयोजन सम्पन्न हुआ।

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