व्यवसाय में योग की प्रतिष्ठा करता है अणुव्रत : डॉ. दिलीप धींग


व्यवसाय में योग की प्रतिष्ठा करता है अणुव्रत : डॉ. दिलीप धींग
अणुव्रत लेखक मंच (प्रकल्प : अणुव्रत विश्व भारती) द्वारा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व संध्या पर 20 जून को सुप्रसिद्ध साहित्यकार एवं प्रखर चिंतक डॉ. दिलीप धींग का ई-व्याख्यान आयोजित किया गया। ‘अणुव्रत लेखक पुरस्कार सम्मानित व्यक्तित्व वक्तव्य श्रृंखला’ के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम का विषय था— “अणुव्रत : अर्जन में अहिंसा और विसर्जन में विवेक का मार्ग”।

अपने विचार व्यक्त करते हुए डॉ. धींग ने कहा कि अणुव्रत और योग दर्शन दोनों का प्रथम सिद्धांत अहिंसा है। उन्होंने कहा कि शाकाहार के बिना अहिंसा की पूर्ण साधना संभव नहीं है और अहिंसा के अभाव में योग भी अधूरा रह जाता है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि आज कुछ स्थानों पर योग को भी व्यवसाय का माध्यम बना दिया गया है, जबकि भारतीय चिंतन परंपरा ने व्यवसाय में भी योग की प्रतिष्ठा की है। कर्म में कुशलता को योग मानते हुए उन्होंने कहा कि अणुव्रत व्यवसाय में अहिंसा, नैतिकता और मानवीय मूल्यों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करता है।

डॉ. धींग ने अपनी कविता के माध्यम से कहा कि किसी भी युद्ध में अंततः हथियारों के सौदागर जीतते हैं और मानवता हार जाती है। उन्होंने कहा कि यदि हथियारों के व्यापार पर अंकुश लगाया जाए तो अशिक्षा, गरीबी और बीमारियों जैसी वैश्विक समस्याओं से प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसा कोई व्यवसाय नहीं किया जाना चाहिए, जिसमें मूक प्राणियों की हिंसा जुड़ी हो। अहिंसक एवं नैतिक व्यवसायों में निवेश कर रोजगार सृजन को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अर्जन के साथ-साथ विसर्जन का भाव भी आवश्यक है। अनासक्त जीवन की साधना अर्जन और विसर्जन के संतुलन से ही संभव है, क्योंकि “अर्जन और विसर्जन के बीच ही सर्जन होता है।”

कार्यक्रम के प्रारंभ में अणुविभा के अध्यक्ष प्रतापसिंह दुगड़ ने अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए अणुव्रत आचार संहिता का वाचन किया। प्रेरणा उद्बोधन में अणुविभा के उपाध्यक्ष कैलाश बोराणा ने अणुव्रत  को जीवन में उतारने की प्रेरणा  देते हुए  अपना प्रेरक अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार उन्होंने आर्थिक हानि सहकर भी अणुव्रत और अहिंसा के सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।
अणुव्रत लेखक मंच के संयोजक जिनेन्द्र कुमार कोठारी ने मुख्य वक्ता डॉ. धींग का परिचय प्रस्तुत किया। श्री राजेंद्र कुमार सेठिया ने नशामुक्ति अभियान की सफलता से जुड़ा संस्मरण साझा किया तथा डॉ. एस.पी.जैन ने हृदय-परिवर्तन की आवश्यकता पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम में अणुव्रत महासमिति के पूर्व अध्यक्ष अशोक संचेती, गौतम सेठिया, बी.एल. आच्छा, प्रकाश तातेड़, डॉ. स्वाति शाह भंसाली, संतोष सेठिया सहित अनेक श्रोता उपस्थित रहे। स्मिता महेंद्र जैन ने अणुव्रत गीत का भावपूर्ण प्रस्तुतीकरण किया तथा कार्यक्रम का सफल संचालन भी किया।

— जिनेन्द्र कुमार कोठारी
 राष्ट्रीय संयोजक, अणुव्रत लेखक मंच

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