अधूरे रह गये अरमान बाबूजी
अधूरे रह गये अरमान बाबूजी
तुम्हें खो कर अधूरे रह गये अरमान बाबूजी।।
है बौने शब्द कर सकते नहीं गुनगान बाबूजी।।
मधुर स्मृतियों को दिल में संजोये आज भी हैं हम-
नमन् सत् बार करते हैं मेरे अभिमान बाबूजी।।
कोई समता नहीं जग में तुम्हारा प्यार बाबूजी।।
हिमालय थे अडिग कुल के मेरे आधार बाबूजी।।
हृदय आकाश से ऊंचा समन्दर की थी गहराई-
छलकता था दृगों से नेह अपरम्पार बाबूजी।।
हमारे जन्मदाता और पालन हार बाबूजी।।
समन्दर दिल में लहराता था निर्मल प्यार बाबूजी।।
पिता परमात्मा का रूप पावन नमन् करते हैं-
हमारी नन्हीं आँखों के वृहद संसार बाबूजी।।
निरा पतझड़ में मेरे वास्ते मधुमास बाबूजी।।
उपस्थिति आप की होती हमें आभास बाबूजी।।
हे स्मृति शेष तन से है विलग मन में बसे हो तुम-
हृदय में आज भी करते हैं मेरे वास बाबूजी।।
इरादों के तो सचमुच आप थे चट्टान बाबूजी।।
डिगा पाया नहीं कोई अडिग ईमान बाबूजी।।
मुझे पल पल सताती याद आती है नमन् सत् सत्-
हृदय से प्यार करते हैं सदा सम्मान बाबूजी।।
---------9919667469
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