पुस्तक समीक्षा---बेटे का विवाहलेखक : श्री रामजीत मिश्रविधा : कहानी-संग्रह
पुस्तक समीक्षा---बेटे का विवाह
लेखक : श्री रामजीत मिश्र
विधा : कहानी-संग्रह
समकालीन हिंदी कथा-साहित्य में ऐसे कहानी-संग्रह विशेष महत्व रखते हैं, जो जीवन के सामान्य प्रतीत होने वाले प्रसंगों को गहन संवेदना, सामाजिक सरोकार और मानवीय मूल्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। श्री रामजीत मिश्र का कहानी-संग्रह "बेटे का विवाह" इसी श्रेणी की एक उल्लेखनीय कृति है, जो पाठक को भारतीय समाज और पारिवारिक जीवन के विविध आयामों से परिचित कराती है।
इस संग्रह की कहानियाँ केवल घटनाओं का वर्णन नहीं करतीं, बल्कि जीवन के अनेक रंगों, संबंधों की ऊष्मा, सामाजिक परिवर्तन, मानवीय संघर्ष और नैतिक मूल्यों को भी अभिव्यक्ति देती हैं। लेखक ने अपने व्यापक जीवनानुभवों के आधार पर ऐसे पात्रों और परिस्थितियों का सृजन किया है, जिनसे पाठक सहज ही आत्मीय संबंध स्थापित कर लेता है।
पुस्तक का शीर्षक "बेटे का विवाह" भारतीय पारिवारिक जीवन की एक महत्वपूर्ण घटना की ओर संकेत करता है, किंतु संग्रह की व्यापकता इससे कहीं अधिक है। इसमें परिवार, समाज, पीढ़ियों के बदलते संबंध, परंपरा और आधुनिकता के द्वंद्व, मानवीय संवेदनाओं तथा सामाजिक यथार्थ का सजीव चित्रण मिलता है। लेखक ने जीवन की छोटी-छोटी घटनाओं में निहित गहरे अर्थों को अत्यंत प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है।
श्री रामजीत मिश्र की भाषा सरल, सहज और संप्रेषणीय है। उनकी लेखनी में कृत्रिमता नहीं, बल्कि जीवन का स्वाभाविक प्रवाह दिखाई देता है। कथानकों की रोचकता, पात्रों की जीवंतता तथा संवादों की स्वाभाविकता पाठक को आरंभ से अंत तक बाँधे रखती है। कहानियाँ मनोरंजन के साथ-साथ चिंतन और आत्ममंथन के लिए भी प्रेरित करती हैं।
इस कहानी-संग्रह की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसकी मानवीय संवेदना है। लेखक ने समाज के विविध वर्गों, पारिवारिक संबंधों और जीवन-संघर्षों को जिस आत्मीयता से चित्रित किया है, वह उनकी गहरी सामाजिक दृष्टि और मानवीय प्रतिबद्धता का परिचायक है। अनेक कहानियाँ पाठक को अपने जीवन और परिवेश की याद दिलाती हैं तथा उसे सामाजिक और नैतिक मूल्यों के प्रति सजग बनाती हैं।
समग्र रूप से "बेटे का विवाह" एक सार्थक, पठनीय और संग्रहणीय कहानी-संग्रह है। यह हिंदी कथा-साहित्य की उस परंपरा को आगे बढ़ाता है, जिसमें साहित्य केवल मनोरंजन का साधन न होकर समाज और जीवन को समझने का माध्यम भी बनता है। मुझे विश्वास है कि यह पुस्तक पाठकों के बीच सम्मानपूर्वक स्थान प्राप्त करेगी तथा साहित्य-जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बनाएगी।
लेखक श्री रामजीत मिश्र को इस उत्कृष्ट कृति के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
समीक्षक
प्रभात कुमार शर्मा
सेवा निवृत्त प्राचार्य
नवोदय विद्यालय समिति
नई दिल्ली
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