*दिव्यांग बच्चों के सपनों को मिलेगी नई उड़ान, अब मजबूरी नहीं बनेगी उनकी पहचान*
*दिव्यांग बच्चों के सपनों को मिलेगी नई उड़ान, अब मजबूरी नहीं बनेगी उनकी पहचान*
रिपोर्टर,सुरेश कुमार शर्मा
जौनपुर।
कभी-कभी जिंदगी इंसान की परीक्षा लेती है। लेकिन हौसलों के आगे हर मुश्किल छोटी पड़ जाती है। ऐसे ही उन मासूम दिव्यांग बच्चों के लिए एक उम्मीद की किरण बनकर सामने आया विकास भवन जौनपुर में आयोजित संगोष्ठी कार्यक्रम, जहां उनके भविष्य और उच्च शिक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल की गई।
जिन बच्चों की आंखों ने दुनिया को अलग अंदाज में देखा, जिनके कदमों ने संघर्षों के रास्ते पर चलना सीखा, और जिनके सपनों के सामने कभी-कभी समाज की बंदिशें दीवार बन जाती थीं, आज उन्हीं बच्चों के सपनों को पंख देने की बात हुई।
जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी राजेश कुमार नायक के नेतृत्व में आयोजित संगोष्ठी में दिव्यांग बच्चों की कक्षा 8 के बाद की शिक्षा, उनके अधिकारों और बेहतर भविष्य को लेकर गहन चर्चा की गई।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ के कुलपति डॉ. संजय सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय में दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों के लिए शिक्षा के रास्ते आसान बनाए जा रहे हैं। जहां फीस में राहत, हॉस्टल और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। ताकि कोई बच्चा केवल अपनी शारीरिक परिस्थिति के कारण अपने सपनों से दूर न हो।
विशिष्ट अतिथि उपनिदेशक मीनू सिंह ने दिव्यांगता के क्षेत्र में संचालित योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी दी। विश्वविद्यालय से आए दुष्यंत त्यागी ने हियरिंग इंपेयर्ड, दृष्टिबाधित सहित विभिन्न दिव्यांगजनों के लिए उपलब्ध विशेष व्यवस्थाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
इस मौके पर जिले की विभिन्न संस्थाओं के अध्यक्ष/सचिव, जिला विद्यालय निरीक्षक, समाज कल्याण अधिकारी, पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी सहित अनेक अधिकारी और गणमान्य लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम का संचालन जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी द्वारा किया गया। इस अवसर पर बड़े बाबू घनश्याम, डॉ. प्रमोद कुमार सैनी, डॉ. संजय मिश्रा, डॉ. संतोष सिंह, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. राहुल राजभर सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
आज जरूरत सिर्फ सहानुभूति की नहीं, बल्कि ऐसे हाथों की है। जो इन बच्चों को सहारा दें, ऐसे कदमों की है। जो उनके रास्ते आसान करें। क्योंकि हर दिव्यांग बच्चे के अंदर भी एक सपना पलता है। एक उम्मीद सांस लेती है। और एक ऐसा भविष्य छिपा होता है। जिसे केवल एक अवसर की जरूरत होती है।
इन बच्चों की मुस्कान ही समाज की असली इंसानियत की पहचान है।
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