‌बैक फुट पर महाराष्ट्र सरकार ,सूचना मांगने का उद्देश्य बताना अब अनिवार्य नहीं

‌बैक फुट पर महाराष्ट्र सरकार ,सूचना मांगने का उद्देश्य बताना अब अनिवार्य नहीं
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार द्वारा 12 जून 2026 को जारी किए गए नए सूचना का अधिकार नियमों में आवेदक के लिए सूचना मांगने का उद्देश्य बताना अनिवार्य किया गया था। लेकिन महज़ एक सप्ताह के भीतर, 19 जून 2026 को सरकार ने यह प्रावधान वापस ले लिया। इस पर सूचना अधिकार कार्यकर्ता अनिल गलगली ने गंभीर सवाल उठाए हैं। यदि सूचना मांगने का उद्देश्य बताने की शर्त सही और वैध थी, तो उसे एक सप्ताह में वापस क्यों लिया गया? और यदि वह गलत थी, तो उसे मूल नियमों में शामिल ही क्यों किया गया? सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के मूल सिद्धांतों के अनुसार नागरिक को सूचना मांगने के लिए कारण बताने की आवश्यकता नहीं है। ऐसे में सरकार का यह यू-टर्न दर्शाता है कि नए नियम पर्याप्त कानूनी और लोकतांत्रिक विचार-विमर्श के बिना तैयार किए गए थे।
अनिल गलगली ने यह भी कहा है कि नए बदलावों को विधानसभा के पटल पर प्रस्तुत किए बिना सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा निर्णय जारी किया गया है, जिसकी प्रधान सचिव स्तर पर जांच होनी चाहिए।
इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि नए नियमों की कई धाराएँ जल्दबाज़ी में तथा सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की मूल भावना के विपरीत तैयार की गई हैं।अब नागरिकता प्रमाण, अपील शुल्क, वकीलों पर प्रतिबंध तथा 150 शब्दों की सीमा जैसी अन्य विवादित शर्तों पर भी पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

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