*मैं जड़त्व की अवस्था में हूँ....!*

*मैं जड़त्व की अवस्था में हूँ....!*
पता नहीं क्यों.....?
मैं दे नहीं पाता हूँ...
कोई भी प्रतिक्रिया....
किसी भी क्रिया की...
मन,शरीर और आत्मा से भी...
शायद इसीलिए.....!
विश्वास भी नहीं कर पाता...
न्यूटन के इस नियम पर...
कि हर एक क्रिया की....!
होती है एक प्रतिक्रिया....
वास्तविकता क्या है....?
इसका भी मुझे भान नहीं....
हाँ इतना जरूर है....
कि मैं जड़त्व की अवस्था में हूँ....
वेग-आवेग-संवेग सबसे परे....!
साथ ही त्वरण-मंदन से मुक्त....
आकांक्षा भी नहीं है....!
यहाँ गतिमान होने की....
संवेग संरक्षण और ऊर्जा संरक्षण...
दोनों ही नियम...स्वयमेव ही सिद्ध..
इसीलिए कभी-कभी लगता है
कि माया जगत में....कहीं मैं....!
ब्रह्मराक्षस तो नहीं हुआ जा रहा हूँ..
एकदम...आत्मकेंद्रित-आत्मशोधित
मित्रों इन बातों को....!
आप काल्पनिक मान सकते हो,
मुझे हँसी का पात्र मान सकते हो...
पर....सच मानो प्यारे....!
मैंने विज्ञान के सिद्धांतों पर...
खुद को फिट कर लिया है....
और.....कल्पनातीत जीवन....!
जीना शुरु कर दिया है....और....
मेरा यह मानना भी है....
आज के जीवन में बुद्धत्व प्राप्ति का
सबसे सरल मार्ग भी यही है...
जिसने भी कर लिया इस मार्ग का...
समय से अनुसरण और अनुकूलन..
समझ लो प्यारे.....!
जीवन का सफर पूरा करने में....
कहीं कोई बाधा वाकई में नहीं है....
और आगे की राह भी उसकी.....!
निष्कंटक-साफ-सुथरी और सही है
आगे की राह भी उसकी....!
निष्कंटक-साफ-सुथरी और सही है

रचनाकार.....
जितेन्द्र कुमार दुबे
अपर पुलिस उपायुक्त, लखनऊ

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