जौनपुर का सरपतहां पुलिस थाना जनपद की शान, 123 साल पुरानी इमारत बनी वीरानगी में पहचान

जौनपुर का सरपतहां पुलिस थाना जनपद की शान, 123 साल पुरानी इमारत बनी वीरानगी में पहचान
जौनपुर। उत्तर प्रदेश के 1526 थानों में अब जौनपुर का सरपतहां थाना खूबसूरती और व्यवस्था के लिए अलग पहचान बना रहा है। 1902 में स्थापित इस थाने की 123 साल पुरानी इमारत को जस का तस रखते हुए कायाकल्प कर दिया गया है। जिला मुख्यालय से 55 किमी दूर सुल्तानपुर सीमा से सटे वीरान इलाके में स्थित इस थाने को कभी कोई पुलिसकर्मी पोस्टिंग नहीं चाहता था, पर आज यही थाना जिले में सुंदरता के मामले में पहले नंबर पर गिना जा रहा है। थाना प्रभारी यजुवेंद्र सिंह की सोच और लगन ने इस बदलाव की नींव रखी। सबसे बड़ी चुनौती वीरानगी थी। थाने से एक किमी दूर तक चाय की दुकान तक नहीं थी। रोजमर्रा का सामान लेने कर्मियों को रूधौली बाजार जाना पड़ता था। इस दिक्कत को देखते हुए थाना परिसर में ही कंटीन बना दिया गया है। यहां चाय-नाश्ता से लेकर जरूरत का हर सामान उचित मूल्य पर मिलता है। परिसर के भीतर अब हरा-भरा माहौल है। तुलसी वाटिका, भव्य मंदिर और फव्वारे से आंगन सज गया है। जवानों के लिए बॉलीबॉल मैदान और बैडमिंटन कोर्ट बनवाए गए हैं ताकि ड्यूटी के बाद तनाव हल्का हो सके। मुंशी कार्यालय और सीसीटीएनएस कक्ष को पूरी तरह वातानुकूलित किया गया है। भोजनालय की व्यवस्था ने कर्मियों की सबसे बड़ी राहत दी है। मात्र 32 रुपए में भरपेट शाकाहारी भोजन मिलता है। हफ्ते में दो दिन पनीर, एक दिन खीर और एक दिन चावल की जगह पुलाव परोसा जाता है। मांसाहारी कर्मियों के लिए हफ्ते में एक दिन अंडा करी और एक दिन चिकन या मटन की व्यवस्था है। साफ-सफाई और समय पर भोजन से सभी के चेहरे पर खुशी दिखती है। बुनियादी सुविधाओं पर भी खास ध्यान दिया गया है। पूरे थाने को 24 घंटे बिजली-पानी उपलब्ध है। आवासीय भवन स्वच्छ रखे गए हैं और पूरा परिसर अब सोलर पैनल पर निर्भर हो चुका है। इससे बिजली का खर्च भी बचा और पर्यावरण को संदेश भी गया। थाना प्रभारी यजुवेंद्र सिंह मानते हैं कि ये बदलाव अकेले संभव नहीं था। इसमें दीवान संजीव सिंह, सिपाही अंकित राय, पवन यादव और शरद वैश्य की भूमिका अहम रही। स्थानीय जनता के सहयोग से जनभागीदारी से यह मॉडल खड़ा हुआ है। आज सरपतहां थाना सिर्फ कानून-व्यवस्था का केंद्र नहीं, बल्कि पुलिसकर्मियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। जहां पहले पोस्टिंग से लोग बचते थे, वहां अब तैनाती की इच्छा जताई जा रही है। 1902 की विरासत को बचाते हुए 2026 का आदर्श थाना बना सरपतहां, बाकी थानों के लिए प्रेरणा बन रहा है।

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